Chandrayaan 3: चंद्रमा पर कैसा रहा है स्पेसक्राफ्ट भेजने का इतिहास, अमेरिका, चीन और रूस को मिली थी सफलता
भारत चंद्रयान-3 को लॉन्च करने जा रहा, इसपर दुनियाभर के लोगों की निगाहें टिकी हैं। अगर भारत इस मिशन में सफल होता है तो ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। भारत से पहले अमेरिका, चीन और रूस ने इस मिशन में सफलता हासिल की थी।
अमेरिका, रूस और चीन चंद्रमा पर अपना लैंडर सफलतापूर्व उतार चुके हैं, ऐसे में भारत अगर सफलतापूर्वक अपना लैंडर चांद पर लैंड कराता है तो वह इस क्लब में शामिल हो जाएगा। गौर करने वाली बात है कि चंद्रमा पर कई देश अपना मिशन भेज चुके हैं लेकिन बहुत कम को सफलता हाथ लगी है।

अभी तक चंद्रमा पर कुल 110 मिशन भेजे जा चुके हैं, जिसमे से 42 को सफलता मिली है। चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की 38 कोशिशें की गई जिसमें से तकरीबन 52 फीसदी सफल हुईं। भारत से पहले अमेरिका, चीन, भारत, जापान, इजरैल को भी इस मिशन में विफलता मिल चुकी है।
अमेरिका ने 1958, 1972 तक 31 मिशन भेजे, जिसमे से 17 मिशन फेल हुए थे, अमेरिका को सिर्फ 45 फीसदी मिशन में ही सफलता मिली। वहीं रूस की बात करें तो रूस को सिर्फ 21 फीसदी मिशन में सफलता हाथ लगी। रूस ने 33 कोशिशें की जिसमे से 26 बार उसे विफलता हाथ लगी है।
सेंको गोल्ड मुख्य रूप से गोल्ड और डायमंड की ज्वेलरी बेचती है। इसके अलावा सिल्वर, प्लैटिनम, और बेशकीमती पत्थर की ज्वेलरी बेचते हैं। इसके साथ ही कंपनी गोल्ड, सिल्वर के सिक्के और बर्तन भी बेचती है। कंपनी मशीन द्वारा हल्की गोल्ड और डायमंड की भी ज्वेलरी बनाती है और इसे थर्ड पार्टी वेंडर को सप्लाई करती है।
अमेरिका ने अपोलो मिशन के तहत चंद्रमा पर अपना उपग्रह भेजा था और उसे सफलता मिली थी, वहीं सोवियत संघ यानि रूस ने लुना मिशन के तहत उपग्रह चंद्रमा पर भेजा था। लुना-2 मिशन चंद्रमा की सतह पर पहुंचा था।
चांद पर पहले मिशन की बात करें तो अमेरिका ने 17 अगस्त 1958 में इसकी योजना बनाई थी। लेकिन प्रक्षेपण फेल हो गया था। 6 मिशन के बाद 1969 में अमेरिका ने मिशन अपोलो को चंद्रमा पर उतारा था। नील आर्मस्ट्रॉग पहले व्यक्ति बने थे जो जांच पर उतरे थे।












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