मणिपुर जैसा चुनाव प्रचार पूरे देश में हो तो कितना अच्छा होगा, सभी पार्टियों का है एक जैसा रिवाज
इंफाल, 23 फरवरी: देश में इस समय पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। गोवा, पंजाब और उत्तराखंड में वोटिंग हो भी चुकी है। यूपी में बुधवार को चौथे दौर का मतदान हुआ है और बाकी तीन चरणों के चुनाव आगे होने हैं। जबकि, 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा चुनाव के लिए 28 फरवरी और 5 मार्च को दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। यूपी तो यूपी है, बाकी तीनों राज्यों में भी चुनाव प्रचार में काफी घमासान हो चुका है। उत्तर प्रदेश में तो प्रचार के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आए दिन तू-तू, मैं-मैं वाली स्थिति देखने को मिल रही है। लेकिन, उत्तरपूर्व का सुंदर सा प्रदेश मणिपुर सारे चुनावी कोलाहलों से दूर है। यहां चुनाव प्रचार के नाम पर सिर्फ एक परंपरा निभाई जाती है और सभी पार्टियों के लिए वही चुनावी मुहिम है, जिसे वो बड़ी ही पवित्रता के साथ निभाते हैं।

मणिपुर में पार्टी ध्वज की पूजा का है रिवाज
मणिपुर में चुनाव प्रचार के नाम पर एक ऐसा रिवाज है, जिसे कोई भी पार्टी भूलकर भी नहीं भूलती। यह रिवाज है अपने-अपने दलों के झंडों की पूजा करने और फिर उनके ध्वजारोहण करने का। जाहिर है कि यह विधान पवित्रता के साथ जुड़ा है तो इस समारोह की शुरुआत भी शुभ मुहूर्त के साथ होती है। उदाहरण के लिए राज्य के सेकमाई विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार हेइखम डिंगो सिंह के लिए भी एक ऐसे ही झंडोतोलन समारोह का आयोजन किया गया। बाकी हर विधानसभा क्षेत्र में भी यही विधि अपनाई जाती है।

चींटी से बनी मिट्टी का होता है झंडे में इस्तेमाल
हेइखम डिंगो ने न्यूज18 से इस रिवाज के बारे में कहा, 'सभी पार्टियों में यह रस्म होता है। इसमें समय का खास महत्त्व है और झंडे में चींटी से बनी मिट्टी की विशेष अहमियत होती है। मैं आभारी हूं कि मेरा झंडा फहराने के लिए मुख्यमंत्री (एन बीरेन सिंह) आने वाले हैं। अगर सब कुछ समय पर होता है,सभी गांव वाले हिस्सा लेते हैं तो सुनिश्चित होता है कि उम्मीदवार की जीत होगी।'

उम्मीदवार के लिए फल, चावल, सब्जियां लेकर आती हैं महिलाएं
उम्मीदवार को इलाके में कैसा समर्थन है, यह इस बात से भी नजर आ जाता है कि कैसे टोलियों में खासकर महिलाएं- चावल, सब्जियां और फल लेकर बैनर के साथ समारोह स्थल पर जुटती हैं। इसी समारोह में चावल और फल लेकर पहुंची सुषमा नाम की महिला ने कहा, 'देखिए, यही हमारा रिवाज है, हम जिस उम्मीदवार का समर्थन करते हैं, उसके लिए हम अपने खेत में जो भी पैदा करते हैं, वह सब लेकर आते हैं। हम इसे अपने उम्मीदवार को देते हैं और उसे बताते हैं कि हम उसी को ही वोट करने वाले हैं।'

शुभ मुहूर्त का है विशेष महत्त्व
एक ऐसे ही कार्यक्रम में शुभ मुहूर्त से ठीक पहले मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह भी पहुंच जाते हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम के बारे में बताया, 'आप जानते हैं कि यह झंडा फहराना प्रत्याशी की ताकत दिखाता है, लेकिन अलग तरीके से। हम सब कुछ खास समय के साथ ही करते हैं। मैं पूरी कोशिश करता हूं कि हमारे उम्मीदवार के झंडा फहराने के कार्यक्रम में पहुंच जाऊं।'

मणिपुर में चुनाव प्रचार का ये अंदाज मिसाल है
जैसा कि बताया कि इस रिवाज और परंपरा का पालन सिर्फ भाजपा उम्मीदवार ही नहीं करते। कांग्रेस और उसकी सहयोगी सीपीएम जैसी पार्टियां भी यह रस्म निभाती हैं। ऐसे कार्यक्रमों में उनके भी झंडे लटके दिखते हैं। कोई हल्ला-हंगामा नहीं और ना ही किसी तरह से प्रचार का शोर। सिर्फ प्यार और तालियां, मणिपुर में उम्मीदवारों को समर्थकों से यही मिलता है। यूं कह लीजिए कि मणिपुर पूरे भारत को एक मिसाल पेश कर रहा है, जिसपर चलकर चुनावी राजनीति का अंदाज ही बदल सकता है। (तस्वीरें सौजन्य- बीजेपी मणिपुर, प्रतिभा भौमिक के ट्विटर के अलावा ट्विटर वीडियो से)












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