रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने पर भी ड्राइवर ट्रेन को कैसे चला लेते हैं?
Waterlogged on Railway Track: उत्तर भारत में भारी बारिश के चलते बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। हिमाचल प्रदेश में तो कई जगह रेलवे ट्रैक भी डूब गए हैं। कई जगह सड़कें भी धंस गई है। इसके चलते रेलवे से लेकर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई हैं। आज हम बारिश से जुड़ा ही एक सवाल आपके लिए लेकर आए हैं कि आखिर रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने पर भी ड्राइवर ट्रेन को कैसे चला लेते हैं?
दरअसल, अक्सर बारिश के मौसम में दिल्ली, मुंबई ,चेन्नई और कोलकाता में बारिश का पानी रेलवे ट्रैक पर भी चला आता है। लेकिन फिर भी आप देखते होंगे कि ड्राइवर पानी में डूबे रेलवे ट्रैक पर भी ट्रेन चला लेते हैं। आखिर इतना पानी होने के बाद वे ट्रैक को कैसे बदल पाते हैं? क्या इसमें कोई रिस्क नहीं होता है? नीचे पढ़िए पूरी जानकारी

रेलवे ट्रैक पर पानी भरे होने के बावजूद ड्राइवर ट्रेन कैसे चलाता है? (Water on Railway Track)
दरअसल, इस दौरान ट्रेन को सिमित गति से चलाया जाता है। ट्रैक बदलने के लिए जो प्वॉइंट्स होते हैं तो उन्हें क्लैम्प्स से कसकर ताला लगा दिया जाता है और ट्रेन बिना लाइन बदले सीधी चलती है। पानी भरने से ट्रैक सर्किट फेल हो जाते हैं तो मेन सिग्नल भी फेल हो जाते हैं। लेकिन ऑटोमेटिक सिग्नलिंग में हर एक सिग्नल पोस्ट पर एक Aim Maker लगा होता है। ड्राइवर इसे देखकर ही ट्रेन को लगभग 15 किलोमीटर की स्पीड से चलाते हैं।
बारिश की वजह से 25 ट्रेनें कैंसिल
रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण 25 ट्रेनें रद्द कर दी गई है। देश के कई स्टेशनों के रेलवे ट्रैक पर पानी भरने की खबर आ रही है। मुरादाबाद के कई स्टेशनों पर यार्ड में पानी भरने की खबर सामने आ रही है। अंबाला स्टेशन पर भी रेलवे ट्रैक पर पानी भरने की खबर सामने आ रही है जिससे कई ट्रेनों के रूट डायवर्ट किए गए हैं। वहीं दिल्ली में बाढ़ की चेतावनी के बाद यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है। वहीं उत्तराखंड की धर्म नगरी हरिद्वार में भी रेलवे ट्रैक पर मलवा आ गया था, हालांकि अब इस मलबे को हटा लिया गया।












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