5 राज्यों के Exit poll के नतीजों ने इंडिया गठबंधन के घटक दलों में कैसे बढाया कांग्रेस का कद?
मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम को लेकर कल जारी किए गए एग्जिट पोल से कांग्रेस का मनोबल काफी उपर है। कांग्रेस के नेता लगाकार इन पांचों राज्यों में जीत का दावा कर रहे हैं।
कांग्रेस के नेता 3 दिसंबर को आने वाले नतीजों को लेकर काफी उत्साहित हैं। कांग्रेस के साथ-साथ इंडिया गठबंधन के नेता भी इन नतीजों नजर गड़ाए हुए हैं। माना जा रहा है कि, इन चुनावों के नतीजे इंडिया गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका तय करने वाले हैं।

3 दिसंबर को जितना बड़ा दिन कांग्रेस के लिए होगा, उतना ही इंडिया गठबंधन के घटक दलों के लिए भी। अगर कांग्रेस चार राज्यों में सरकार बनाने में सफल हो जाती है। तो गठबंधन के अंदर जहां कांग्रेस के कद में इजाफा होगा, वहीं सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस अधिक मजूबती से अपना पक्ष रख सकती है। चुनाव के नतीजे अगर कांग्रेस के पक्ष में रहे तो वह इन मुख्य मुद्दों पर फैसले ले सकती है।
➤ घटक दलों के बीच कांग्रेस का ज्यादा सीटों पर दावा बनेगा
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर पेंच शुरू से फंसा हुआ है। अगर एग्जिट पोल के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं। तो वह लोकसभा चुनाव में दूसरे दलों से सीटों की बार्गेनिंग मजबूती से करेगी। बंगाल, यूपी और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में वह सहयोगी दलों से अधिक सीटें मांग सकती है। जिसके चलते कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ पाएगी।
➤ जहां कांग्रेस की बीजेपी से सीधी टक्कर है, वहां पार्टी करेगी लीड
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को लेकर जब चर्चा हो रही थी, तो ऐसा कहा गया था कि, जो पार्टी जिन राज्यों में मजबूत है, उसे सबसे अधिक सीटें मिलेंगी। पांच राज्यों के चुनाव नतीजे अगर कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं। तो कांग्रेस गठबंधन में यह दावा कर सकती है कि, जहां कांग्रेस से बीजेपी का सीधा मुकाबला है। वहां कांग्रेस ही लीड करेगी। इसके अलावा यह राय भी बनेगी कि, कांग्रेस ही वह पार्टी है जो बीजेपी को सीधे टक्कर दे सकती है।
➤ कांग्रेस सही मुद्दे उठाकर भाजपा को हिंदुत्व कार्ड नहीं चलने दे रही
2014 के बाद यह पहला चुनाव है। जहां कांग्रेस ने किसी भी राज्य में बीजेपी के हिन्दुत्व के कार्ड को चलने नहीं दिया है। पांच राज्यों के इस चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस द्वारा सेट की गई पिच पर पूरा चुनाव लड़ा है। बीजेपी और पीएम मोदी पूरे चुनाव में हिंदुत्व के कार्ड को चलाने में असफल नजर आए। कांग्रेस इन चुनावों में रोजगार, महंगाई, भ्रष्टाचार, अडानी जैसे अहम मुद्दों को उठाकर बीजेपी औऱ पीएम मोदी को घेरती रही। अगर एग्जिट पोल के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहे तो 2024 के चुनाव में कांग्रेस तय करेगी कि, लोकसभा चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
➤ टीएमसी, सपा और आप जैसे दल बैकफुट पर होंगे, जो चुनाव से ठीक पहले आंख दिखा रहे थे
इंडिया गठबंधन में कांग्रेस को सबसे अधिक चुनौती टीएमसी, आप और समाजवादी पार्टी से मिल रही है। वे लगातार सीट शेयरिंग के मसले या फिर अन्य मुद्दों पर कांग्रेस को आंख दिखाते नजर आए। अगर बात समाजवादी पार्टी की करें तो मध्यप्रदेश चुनाव से पहले सीट शेयरिंग के मुद्दे पर वह कांग्रेस से मुंह फुलाकर बैठ गई थी। सीट शेयरिंग पर सहमति न बन पाने के बाद सपा ने पूरी दम से मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ा था। उसने मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी कांग्रेस के सामने चुनौती खड़ी की थी।
वहीं अगर बात आम आदमी पार्टी की करें तो वह भी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनावी मैदान में थी। जिसने इंडिया गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए थे। अगर इन चुनावों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं और कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में उलटफेर करती है तो सपा और आप को अपनी 'टोन' सेट करनी होगी। वह सीट शेयरिंग में मनमानी नहीं कर पाएंगे। गठबंधन की छतरी के नीचे कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए झुकना भी पड़ेगा।
➤ कांग्रेस गठबंधन का संयोजक कौन होगा ये तय करने में अहम भूमिका निभाएगी
इंडिया गठबंधन के गठन से ही इसके संयोजकों को लेकर कई नाम सामने आ चुके हैं। संयोजक के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित शरद पवार का नाम चर्चा में है। लेकिन अभी इस पर फैसला होना बाकी है। माना जा रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद जल्द ही इंडिया गठबंधन की बैठक होगी। जिसमें संयोजक और सीट शेयरिंग पर बात होनी हैं। अगर पांच राज्यों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में रहते हैं तो इन दोनों मुद्दों पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहने वाला है। कांग्रेस के पास इस बात की ताकत होगी कि, इंडिया गठबंधन का संयोजक कौन होगा?












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