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कुत्तों को एक्सीडेंट से बचाने वाला शांतनु कैसे बन गया रतन टाटा का असिस्टेंट, खुद बताई पूरी कहानी

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नई दिल्ली। दिग्गज उद्योगपति और टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के साथ काम करना हर किसी का सपना होता है लेकिन किन्हीं खुशकिस्मत लोगों को ही यह मौका मिलता है। उन्हीं खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं 27 वर्षीय शांतनु नायडू जो कि रतन टाटा के साथ उनके असिस्टेंट के रूप में काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर शांतनु नायडू ने एक पोस्ट शेयर कर बताया है कि किस तरह रतन टाटा ने उन्हें उनकी ड्रीम जॉब का ऑफर दिया।

आवारा कुत्तों के लिए बनाया पट्टा

आवारा कुत्तों के लिए बनाया पट्टा

शांतनु ने पोस्ट में बताया कि रतन टाटा से उनकी पहली मुलाकात 2014 में हुई थी इसके पीछे भी एक कहानी है। शांतनु बताते हैं, पांच साल पहले एक सड़क हादसे में आवारा कुत्ते को मरता हुआ देख उनके जीवन में बदलाव आया और उसके बाद उन्होंने आवारा कुत्तों को सड़क हादसों से बचाने के लिए काम करना शुरू कर दिया। शांतनु को ऐसे कुत्तों के लिए एक पट्टा बनाने का आइडिया आया जो ड्राइवरों को दूर से ही दिखाई दे सके।

रतन टाटा को पसंद आया शांतनु का आइडिया

रतन टाटा को पसंद आया शांतनु का आइडिया

शांतनु ने बताया कि मेरा यह आइडिया तेजी से वायरल हो गया और इसके उपर टाटा समूह के समाचार पत्रों में भी एक लेख प्रकाशित हुआ। मेरे पिता ने वह लेख देखने के बाद मुझे रतन टाटा को एक चिट्ठी लिखने को कहा। मेरे पिता ने बताया कि रतन टाटा को भी कुत्तों से बहुत प्यार है और वह मेरे पत्र का जवाब जरूर देंगे। शांतनु बताते हैं कि, शुरू में वह घबराए लेकिन पत्र लिखने के दो महीने बाद कंपनी की ओर से जवाब आया।

टाटा समूह ने फिक्स कराई मीटिंग

टाटा समूह ने फिक्स कराई मीटिंग

पत्र के जवाब में शांतनु को रतन टाटा से मिलने के लिए आमंत्रित किया गया, शांतनु ने बताया कि उनको इन सब पर यकीन नहीं हो रहा था। कुछ दिनों बाद शांतनु टाटा समूह की बिल्डिंग पहुंचे और वहां रतन टाटा से मुलाकात की। मीटिंग में उन्होंने कहा कि, आप जो काम करते हैं मैं उससे बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ हूं। इसके बाद रतन टाटा शांतनु को अपने घर ले गए और अपने कुत्तों से मिलवाया, इसके अलावा उन्होंने शांतनु के काम के लिए फंड भी दिया।

रतन टाटा ने फोन पर दिया जॉब ऑफर

रतन टाटा ने फोन पर दिया जॉब ऑफर

शांतनु बताते हैं कि मीटिंग में मैंने रतन टाटा से वादा किया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह टाटा ट्रस्ट के लिए काम करेंगे। शांतनु कहते हैं कि विदेश से पढाई पूरी करने के बाद जैसे ही वह भारत पहुंचे तो रतन टाटा ने उन्हें फोन किया और कहा, मुझे ऑफिस में बहुत काम होता है क्या आप मेरे असिस्टेंट बनना चाहोगे। शांतनु कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या रिएक्शन दें, कुछ सेकेंड बाद उन्होंने हां कह दिया। शांतनु का यह पोस्ट अब वायरल हो गया है और उन्हें 6 हजार से ज्यादा लाइक्स मिले हैं।

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English summary
How did Shantanu Naidu become Ratan Tata assistant Full story share on Facebook
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