दिल्ली में सिर्फ ऐसे बन सकती है भाजपा की सरकार

भाजपा को 35 करने के लिये अन्य विधायकों को उनकी-उनकी पार्टियों से तोड़ना होगा, या फिर कांग्रेस के विधायकों पर चारा डालना होगा, क्योंकि आम आदमी पार्टी में भाजपा की दाल नहीं गलने वाली। अरविंद केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं, कि वो किसी भी पार्टी के साथ नहीं जायेंगे। और इन्हीं उसूलों पर आप के जीते हुए प्रत्याशी भी चल रहे हैं। यानी अब भाजपा को तीन सीटें चाहिये तो कांग्रेस के 8 विधायकों में से 4 को तोड़ना होगा। वैसे कांग्रेस के इनकंबेंसी फैक्टर की वजह से मिली हार का मलाल कई जीते हुए विधायकों को भी है।
और तो और 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का ऐसा ही हाल होने की भविष्यवाणी कई राजनीतिक पंडितों ने कर दी है। यानी जो विधायक कांग्रेस का दामन पकड़े रहे उनका निकटतम भविष्य में कोई भला नहीं होने वाला। लिहाजा कांग्रेस के 8 में से 4 विधायक आसानी से टूट कर भाजपा में जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा उनका न केवल खुलकर स्वागत करेगी, बल्िक महत्वपूर्ण मंत्रालय तक देने को राजी हो सकती है।
सबसे बड़ी पार्टी के रूप में वापसी करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व उसके सहयोगी अकाली दल ने 32 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि 28 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी (आप) सबसे बड़ा उलटफेर करने वाली पार्टी के रूप में सामने आई है। 'आप' ने पारंपरिक राजनीति में बदलाव का संकेत भी दिया है। तीन बार से दिल्ली की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को न सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा, बल्कि राज्य में उनकी कांग्रेस पार्टी को सर्वाधिक घाटा हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव-2008 की अपेक्षा कांग्रेस को 35 सीटों का नुकसान हुआ है, और कांग्रेस सिर्फ आठ सीटें जीत सकी।
अगर 4 की जगह दो कांग्रेसी भी टूट गये, तो भी भाजपा की सरकार बन सकती है। दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं, तथा सरकार बनाने के लिए कम से कम 36 सीटें जीतना अनिवार्य है।












Click it and Unblock the Notifications