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कैसे 73 साल की विधवा ने 52 साल संघर्ष के बाद जीती 43 बीघा जमीन की जंग

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National Girl Child Day- गुजरात में 73 साल की एक विधवा ने पांच दशक से ज्यादा के संघर्ष के बाद अपने पति की जमीन पर मालिकाना हक पाया है। जमीन भी थोड़ी-बहुत नहीं थी, पूरे 43 बीघा जमीन थी, जिसे उसके ससुराल वालों ने इतने वर्षों तक गलत तरीके से हथिया रखा था। सबसे बड़ी बात है कि करीब 40 वर्षों तक उस अकेली विधवा के पास पति की पुश्तैनी जमीन से जुड़े कोई भी कागजात नहीं थे। लेकिन, उसने कभी हौसला नहीं हारा और अपना हक पाने के लिए संघर्ष में जुटी रही। उसे तो पता तक नहीं था कि पति के पास कितनी जमीन थी और वो कहां पर थी? लेकिन, 52 साल बाद अब जाकर पुलिस की मदद से उसने अपनी जमीन पर कब्जा पा लिया है। आज इस खबर की अहमियत इसलिए भी कि देश नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मना रहा है। (तस्वीरें- सांकेतिक)

कम उम्र में हुई शादी लेकिन दोबारा शादी नहीं की

कम उम्र में हुई शादी लेकिन दोबारा शादी नहीं की

73 वर्षीय लीला महिदा की शादी 1967 में गुजरात के खेड़ा जिले के नाडिया इलाके के एक गांव के संपत सिंह महिदा से हुई थी। शादी के एक साल बाद ही उसके पति की मौत हो गई। बहुत ही कम उम्र में विधवा हो जाने की वजह से लीला रहने के लिए मायके अपने माता-पिता के पास लौट गईं। उसके लिए दोबारा शादी करना नामुमकिन था, क्योंकि उसके समाज में विधवाओं की शादी की मनाही है। लीला के साथ-साथ उसके माता-पिता के लिए भी बेटी का जीवन पहाड़ लग रहा था। लीला को भी समझ नहीं आ रहा था कि उसका बाकी का जीवन किसके सहारे कटेगा और खासकर बुजुर्ग मां-बाप के बाद उसका क्या होगा? वह किसके भरोसे रहेगी। एक साल तक इसी जद्दोजहद में जिंदगी बीती। 1968 में कहीं से उसे भनक लगी कि उसके ससुराल में उसके पति की पुश्तैनी जमीन पड़ी है। उसके पति की मौत हो चुकी थी,इसलिए उस जमीन पर उसका हक बनता था।

जमीन के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी

जमीन के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी

लीला ने अपने पति के भाई महिपत सिंह से उस जमीन के बारे में जानकारी मांगी तो उसने आनाकानी करना शुरू कर दिया और सीधा जवाब देने से बचने लगा। लीला को महसूस हो गया कि उसके जेठ के इरादे में खोट है और वो उसे उसके पति की जमीन नहीं देना चाहता। इसके बाद उस युवा विधवा के जीवन का सबसे लंबा संघर्ष शुरू हुआ। उसने जमीन कहां है? कितनी जमीन है? इसके साथ ही प्रॉपर्टी की कानूनी स्थिति क्या है? इसके बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी। वो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने लगी। इस दौरान महिपत सिंह के संयुक्त परिवार के कई लोगों की मौत हो गई और कोई उत्तराधिकारी नहीं बच गया।

जेठ ने धोखे से अपने नाम कर रखी थी जमीन

जेठ ने धोखे से अपने नाम कर रखी थी जमीन

करीब चार दशक तक लीला संपत सिंह महिदा ऐसे ही सरकारी दफ्तरों से लेकर अपने ससुराल तक के खाक छानती रही। आखिरकार चार दशक बाद उसे मामलतादार के दफ्तर से एक दस्तावेज मिला, जिसके मुताबिक उसके पति की पुश्तैनी जमीन का एकमात्र मालिक उसके जेठ महिपत सिंह ही थे। लेकिन, उसका दिल नहीं मान रहा था। उसने अपनी छानबीन आगे भी जारी रखी। तब जाकर पता चला कि महिपत ने उसके परिवार का एक जाली उत्तराधिकार प्रमाणपत्र देकर पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम कर ली थी, जिसमें लीला या उसके पति के नाम का जिक्र तक नहीं था।

52 साल संघर्ष के बाद मिला 43 बीघा जमीन पर कब्जा

52 साल संघर्ष के बाद मिला 43 बीघा जमीन पर कब्जा

तब उसने अपने पति की जमीन पर अपना हक जताने की निर्णायक लड़ाई शुरू की। उसने खेड़ा कलेक्ट्रेट की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के सामने पुश्तैनी जमीन के सारे जुटाए गए दस्तावेज पेश किए, जिसने इसपर आगे की तहकीकात शुरू की। इस जांच टीम ने पिछले साल 18 दिसंबर को पाया कि महिपत सिंह ने जालसाजी की है। इसके बाद महिमत सिंह के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया और पुलिस की मदद से ही लीला को अपने पति की 43 बीघा जमीन पर कब्जा मिल गया।

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English summary
How 73-year-old widow won 43 bigha land battle after 52 years of struggle
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