ट्रांसजेंडर्स को मिले जेंडर चुनने का अधिकार: पर्लियामेंट्री पैनल

बीजेपी सांसद रमेश बैस के नेतृत्व वाली 31 सदस्‍यीय समिति ने ट्रांसजेंडर समुदाय (अधिकारों की सुरक्षा) बिल 2016 को लोकसभा में शुक्रवार को पेश किया गया।

नई दिल्ली। ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर बीजेपी सांसद के नेतृत्व वाली संसदीय समिति ने आवाज उठाई है। रायपुर से सात बार लोकसभा सांसद रमेश बैस की अध्‍यक्षता में संसदीय समिति ने ट्रांसजेंडर समुदाय को सशक्‍त बनाने के लिए अहम कोशिश की है। समिति ने कहा है कि ट्रांसजेंडर होने में कोई शर्म नहीं है। ट्रांसजेंडर के सामाजिक न्‍याय और सशक्‍तिकरण को लेकर ये संसदीय समिति खास रिपोर्ट लाई है। इसमें कहा गया है कि ट्रांसजेंडर्स को जेंडर चुनने का अधिकारी मिले।

ट्रांसजेंडर्स को मिले जेंडर चुनने का अधिकार: संसदीय समिति

बीजेपी सांसद रमेश बैस के नेतृत्व वाली 31 सदस्‍यीय समिति ने ट्रांसजेंडर समुदाय (अधिकारों की सुरक्षा) बिल 2016 को लोकसभा में शुक्रवार को पेश किया गया। इस बिल के जरिए ट्रांसजेन्डर को परिभाषित करने और इस समुदाय के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने की कोशिश की है। समिति का मानना है कि 2011 की जनगणना में ट्रांसजेंडर्स की संख्या 6 लाख थी। ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार होमोसेक्सुअलिटी और ट्रांसजेंडर के अधिकारों को लेकर दबाव में है।

भाजपा सांसद रमेश बैस की अध्‍यक्षता में संसदीय समिति ने केंद्र सरकार की ओर से ट्रांसजेंडर बिल के मसौदे में जरूरी अधिकारों जैसे शादी और तलाक के मुद्दे नहीं उठाए जाने की आलोचना की है। बता दें कि आईपीसी की धारा-377 के तहत समलैंगिकता को आपराधिक माना गया है। इस संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये बिल शादी और तलाक जैसे अधिकारों का उल्‍लेख नहीं करता है। जिसकी वजह से ट्रांसजेंडर समुदाय मुश्‍किल में हैं।

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