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Holika Dahan 2025: होलिका दहन के राख से मिलेंगे चमत्कारी लाभ, इन उपायों से होगी धनवर्षा

Holika Dahan 2025: होली का त्योहार पूरे देश में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। रंगों के इस त्योहार से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इसके राख से चमत्कारी लाभ मिलते है। चलिए जानते है होली दहन के राख के चमत्कारी लाभ।

होली दहन की राख से व्यापार में उन्नति, बेहतर स्वास्थ्य, तथा ग्रह क्लेश जैसी समस्या से मुक्ति मिलती है। पहले के जबाने में तो होलिका दहन के राख से होली खेलने की भी परंपरा थी। कहा जाता है कि इसके राख को एक दूसरे के माथे पर लगाने से व्यक्ति सालों भर निरोगी रहता है और उसके जीवन के सारे दुख- कष्ट दूर हो जाते है।

Holika Dahan

होलिका दहन के राख के चमत्कारी लाभ

होलिका दहन के बारे में ऐसी मान्यता है कि इसके राख को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन में वृद्धि होती है। व्यापारी लोगों को अपने दुकान के चारों तरफ होलिका की राख का छिड़काव करना चाहिए। इससे व्यापार में सफलता मिलती है। भारत के गांवों में ऐसी मान्यता है कि इसके राख से माथे पर तिलक लगाने से रोग दोष से मुक्ति मिलती है और आप पूरे साल स्वस्थ्य रहते है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन की रात काले तिल की आहुति देने से पितृ दोष दूर होता है। जो लोग सरसों और काले तिल को होलिका की आग में डालते हैं उनके अधूरे कार्य पूरे हो जाते है।

होलिका दहन क्यों मनाया जाता है?

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का असुर रहा करता था। वह भगवान विष्णु से नफरत करता था। जबकि हिरण्यकश्यप का पुत्र था प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और भगवान की पूजा में हमेशा लीन रहता है। बालक प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप ने उसे मारने का निर्णय लिया। हिरण्यकश्यप ने हर वो कोशिश की जिससे वह प्रह्लाद को मार सके लेकिन प्रह्लाद हर बार भगवान विष्णु की कृपा से बच जाता था।

एक दिन उसने अपनी बहन होलिका की मदद लेने की सोची क्योंकि उसे वरदान मिला था। उसके पास एक विशेष साल थी जिससे अग्नि का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। होलिका नन्हे प्रह्लाद को गोद में लेकर आग की चिता पर बैठ गई। अचानक तेज हवा के कारण उसका साल उसके शरीर से हट गया और वह जल गई। लेकिन, भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया। उसी समय से बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन मनाया जाने लगा।

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