Holi 2023 Poems: 'तुम करो कश्मीर होली में...', मशहूर कवियों की लोकप्रिय कविताओं संग मनाएं रंगों का पर्व
Holi ki Kavita: जहां ना पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि, इसलिए होली के जश्न में अगर लोकप्रिय कवियों की मशहूर कविताएं शामिल हो जाए तो पर्व की मिठास गुझिये से भी ज्यादा मीठी हो जाती है।

Holi Poems: पूरा देश होली की मस्ती में चूर है, कहीं होलिका दहन सोमवार को हो चुका तो कहीं आज शाम होलिका दहन होगा। आज के दिन को लोग छोटी होली भी कहते हैं। होली आते ही दिल-दिमाग पर मस्ती छा जाती है। बच्चे-जवान-बूढे सभी फाग के रंग में सराबोर हो जाते हैं। लेकिन होली की मस्ती तब तक अधूरी जब तक उसमें लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन के शब्दों की मिठास ना घुल जाए। उनके गाए फाग हर किसी के जीवन में ऊर्जा और जोश का संचार कर देते हैं और होली के जश्न को दोगुना भी कर जाते हैं।
पेश हैं उनकी लोकप्रिय कविता की कुछ पंक्तियां..........
- खेल चुके हम फाग समय से!
- फैलाकर निःसीम भुजाएं,
- अंक भरीं हमने विपदाएं,
- होली ही हम रहे मनाते प्रतिदिन अपने यौवन वय से!
- खेल चुके हम फाग समय से!
- मन दे दाग अमिट बतलाते,
- हम थे कैसा रंग बहाते
- मलते थे रोली मस्तक पर क्षार उठाकर दग्ध हृदय से!
- खेल चुके हम फाग समय से!
- रंग छुड़ाना, चंग बजाना,
- रोली मलना, होली गाना--
- आज हमें यह सब लगते हैं केवल बच्चों के अभिनय से!
जहां हरिवंश राय बच्चन ने फाग का महत्व समझाया है, वहीं देश की लोकप्रिय कवियों में से एक कवि डॉ.कुमार विश्वास की ये लाइनें तो हर किसी को प्रेम करने पर विवश कर देती हैं...
- 'आज होलिका के अवसर पर जागे भाग गुलाल के
- जिसने मृदु चुम्बन ले डाले हर गोरी के गाल के
- आज रंगो तन-मन अन्तर-पट, आज रंगो धरती सारी
- सागर का जल लेकर रंग दो, काश्मीर केसर-क्यारी
- आज न हों मजहब के झगड़े, हों न विवादित गुरुबानी
- आज वही स्वर गूँजे, जिसमें रंग भरा हो रसखानी
- रंग नही उपहार जानिये, ऋतुपति की ससुराल के
- जिसने मृदु चुम्बन ले डाले हर गोरी के गाल के'
दिल की पीर होली में...
- "हर एक रांझे को मिल जाये जो उसकी हीर होली में
- चटख रंगों में घुल जाये तो दिल की पीर होली में
- हमारे दिल की दिल्ली में जो राजस्थान पसरा है
- उसे छूकर लबों से तुम करो कश्मीर होली में..."
होली पर अगर सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" को नहीं किया याद तो पर्व रह जाएगा फीका
केशर की कलि की पिचकारी
- केशर की, कलि की पिचकारी
- पात-पात की गात सँवारी
- राग-पराग-कपोल किए हैं
- लाल-गुलाल अमोल लिए हैं
- तरू-तरू के तन खोल दिए हैं
- आरती जोत-उदोत उतारी
- गन्ध-पवन की धूप धवारी..












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