जानिए कौन था वो मुसलमान जिसने खोजी थी बाबा बर्फानी की गुफा, हुआ था चमत्कार
नई दिल्ली। देश के लाखों लोग हर साल तमाम मुश्किलातों को दरकिनार करते हुए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू और कश्मीर जाते हैं। क्या आपको पता है कि अमरनाथ की गुफा का इतिहास क्या है? तो आइए आपको हम बताते हैं कि अमरनाथ की गुफा और इसकी यात्रा के पीछे का क्या इतिहास है।

ये है रास्ता
बता दें कि अमरनाथ गुफा राज्य के दक्षिण कश्मीर स्थित हिमालयवर्ती क्षेत्र में है। यह राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से लगभग 141 किमी. की दूरी पर समुद्री ऊंचाई से 3,888 मीटर (12,756 फुट) की उंचाई पर स्थित है। इस तीर्थ स्थल पर पहलगाम और बालटाल के जरिए पहुंचा जा सकता है।

माना जाता है कि...
माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में एक गडेरिये, बूटा मलिक ने इसका पता लगाया। किंवदंती है कि बूटा वहां बकरियां चराने गया था तो वहां उसे एक साधु मिले और उसने अंगीठी जलाने के लिए कोयला दिया। घर पहुंचने पर जब बूटा ने उस थैले को सोने से सिक्कों से भरा हुआ पाया, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। वो महात्मा का धन्यवाद करना चाहता था, लेकिन वह साधु उसे कहीं नहीं मिला। इसकी जगह बूटा ने पवित्र गुफा देखी और उसमें उसे शिवलिंग के दर्शन हुए। उसने इलाके के लोगों को इसके बारे में जानकारी दी। तब से यह तीर्थ यात्रा का पवित्र स्थल बन गया।

यह भी है मान्यता
एक और मान्यता है कि काफी समय पहले कश्मीर घाटी जलमग्न हो गई थी। इसके बाद कश्यप मुनि ने अनेक नदियों और नालों के जरिए इसका पानी निकाल दिया। इस प्रकार जब पानी उतर गया, तो उन्होंने भगवान अमरनाथ के सबसे पहले दर्शन किए। इसके बाद लोगों ने लिंग के बारे में सुना तो यह आस्था वाले सभी लोगों के लिए यह भगवान भोले नाथ का स्थान बन गया। इसके बाद से लाखों लोग हर साल यह यात्रा करते हैं।

इस साल 28 जून को शुरू हुई थी यात्रा
बता दें कि इस साल की यात्रा 28 जून से शुरू हुई। बुधवार सुबह तीर्थयात्रियों का पहला जत्था रवाना हो गया थ। अनंतनाग और गंदेरबाल जिलों के पहलगाम और बालटाल आधार शिविर से 4,000 यात्रियों के पहले जत्थे को जम्मू कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने हरी झंडी दिखाई थी।












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