हिरोशिमा, नागासाकी बम ब्लास्ट पीड़ितों को 80 वर्ष बाद सम्मान, जापानी संगठन ने दिया नोबेल पीस प्राइज

जापान के हिरोशिमा और नाकासाकी में वर्ष 1945 में हुई तबाही में बचे लोगों को नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने नोबल पीस प्राइज 2024 से सम्मानित किया। यह पुरस्कार शांति और परमाणु हथियार के इस्तेमाल जैसी घातक स्थितियों ने बचने के संदेश के साथ दिया जाता है। नोबेल समति की ओर से पुरस्कार देते वक्त परमाणु हथियारों के वैश्विक विरोध को उत्पन्न करने और बनाए रखने के उनके अटूट प्रयासों के लिए निहोन हिडानक्यो की प्रशंसा की गई।

नोबेल समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों ने भीषण संहार देखा, और बाद की परिस्थितियों को झेला वे सही मायने में एक योद्धा हैं। हमले के वक्त एक के बाद एक मौतें देखना और अतुलनीय पीड़ी और दर्द को सहन करने की क्षमता रखना कोई सामान्य बात नहीं है।

Japan atom bomb Nobel Peace Prize

जापान में नोबेल समिति लंबे समय से हिरोशिमा, नाकासाकी में बम ब्लास्ट पीड़ितों के जीवन को नजदीकी से देख रही है। दरअसल, 1956 में गठित, निहोन हिडानक्यो जापान में परमाणु बम पीड़ितों का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली संगठन है। इसका मिशन परमाणु हथियारों के विनाशकारी मानवीय परिणामों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।

क्यों मिला नोबेल पीस प्राइज?
अगस्त 1945 में हुई तबाही की अपनी व्यक्तिगत कहानियों को साझा करके, हिबाकुशा - हिरोशिमा और नागासाकी के बचे लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों से दुनिया के देशों को दूर रहने में मदद की। उन्होंने अपनी आंखों देखी बताई और दुनिया को ये समझाया कि एटॉमिक हथियारों को प्रयोग किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं है, ये दुनिया को कलंकित करने वाला है।

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