Hindenburg Report: अडानी मामले में हिंडनबर्ग का एक और बड़ा खुलासा, अब लेपेटे में SEBI चीफ, जानिए पूरा मामला
Hindenburg Report: अडानी ग्रुप (Adani group) को लेकर रिपोर्ट में बड़े खुलासे के 18 महीने बाद एक बार फिर हिंडनबर्ग रिसर्च एक आरोप लगाया है। इस बार ताजा आरोप सेबी प्रमुख माधबी बुच और उनके पति धवल बुच की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
अमेरिका के शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने अपनी ताजा रिपोर्ट सार्वजनिक कर एक बार फिर चौंका दिया है। रिसर्च कंपनी ने इस बार सेबी चीफ की भूमिका पर सवाल उठा दिए हैं। हिंडनबर्ग की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेबी की चेयरपर्सन माधवी बुच और उनके पति दोनों ही अडानी मनी साइफनिंग घोटाले (Adani Money Siphoning Scandal) में इस्तेमाल किए गए दोनों अस्पष्ट ऑफशोर फंडों में हिस्सेदार के तौर पर शामिल थे।

हिंडनबर्ग की ताजा रिपोर्ट में क्या है दावा?
हिंडनबर्ग की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी समूह पर सबूत पेश किए लगभग 18 महीने हो गए हैं। हमारी रिपोर्ट में ऑफशोर में मुख्य रूप से मॉरीशस-आधारित शेल कंपनियों के एक बड़े नेक्सेस का खुलासा किया गया। इन कंपनियों का उपयोग संदिग्ध अरबों डॉलर के अघोषित संबंधित पार्टी ट्रांजैक्शन,अघोषित निवेश और स्टॉक हेरफेर के लिए किया जाता था।
हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप पर अपनी रिपोर्ट में कहा गया कि ऑफशोर मॉरीशस फंड की स्थापना इंडिया इंफोलाइन के माध्यम से एक अडानी निदेशक द्वारा की गई थी, जो कि टैक्स हेवन मॉरीशस में रजिस्टर्ड है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ठीक उसी फंड का इस्तेमाल गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी ने किया था।
अमेरिकी शॉर्ट सेलर ने दावा किया कि मौजूदा सेबी चेयरपर्सन माधवी बुच और उनके पति धवल बुच के पास उसी अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड में सीक्रेट हिस्सेदारी थी। इन्हीं शेयर का इस्तेमाल गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी ने किया। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में व्हिसिलब्लोअर दस्तावेजों का भी जिक्र किया और कहा कि माधवी बुच और उनके पति धवल बुच ने पहली बार 5 जून, 2015 को सिंगापुर में आईपीई प्लस फंड 1 के साथ अपने अकाउंट की शुरुआत की थी।
रिपोर्ट में आगे लिखा गया,"...हमारी रिपोर्ट की पुष्टि और विस्तार करने वाले 40 से अधिक स्वतंत्र मीडिया जांचों के साथ-साथ सबूतों के बावजूद भारतीय प्रतिभूति नियामक यानी सेबी ने अडानी समूह के खिलाफ कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं की है। इसके बजाय 27 जून, 2024 को सेबी ने हमें एक 'कारण बताओ' नोटिस भेजा। सेबी ने हमारे 106 पेज के विश्लेषण में किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि का आरोप नहीं लगाया। बल्कि यह कहा कि जो भी सबूत दिए गए वो पर्याप्त नहीं है।"












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