हिमंत बिस्व सरमा बोले, मदरसा शब्द का अस्तित्व खत्म हो, सभी मुस्लिम हिंदू हैं
नई दिल्ली, 23 मई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा एक बार फिर अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि मदरसा शब्द का अस्तित्व खत्म होना चाहिए। उन्होंने यह बयान पांचजन्य पत्रिकी की 75वीं वर्षगांठ पर दिया। सरमा ने कहा कि सभी स्कूल सामान्य शिक्षा दे रहे हैं। दरअसल कार्यक्रम में सरमा मौलाना आजाद विश्वविद्यालय हैदराबाद के पूर्व कुलपति के सवालों का जवाब दे रहे थे। गौर करने वाली बात है कि पूर्व कुलपति ने सभी मदरसों को भंग कर उसे स्कूल में परिवर्ति किए जाने के फैसले की सराहना की थी।

जबतक ये मदरसा दिमाग में घूमता रहेगा तबतक वह डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनेगा। अगर बच्चा को आप स्कूल में जाने के समय आप पूछ लेते हैं कि बेटा तुम मदरसा जा रहा है, इस रास्ते से डॉक्टर नहीं बनेगा। आज जरूर कुरान पढ़ाइए, लेकिन सबसे ज्यादा साइंस, मैथ्, जियोलॉजी, बॉटनी पढ़ाइए। इसलिए सभी मदरसे खत्म होने चाहिए। सामान्य शिक्षा होनी चाहिए। घर में आप धर्म पढ़ाइए, 2-3 घंटे पढ़ाइए. लेकिन स्कूल में सिर्फ वही पढ़ाइए जिससे आपका बेटा डॉक्टर, वैज्ञानिक बने।
सरमा ने कहा कि जबतक यह शब्द मदरसा रहेगा बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के बारे में नहीं सोच पाएंगे। मदरसों में पढ़कर वो डॉक्टर इंजीनियर नहीं बनेंगे, लिहाजा बच्चे खुद ही यहां जाने से मना कर देंगे। बच्चों को कुरान घर पर पढ़ाना चाहिए, मदरसों में नहीं। मदरसों में भेजकर आप उनके मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं। बच्चों की पढ़ाई में विज्ञान, गणित का जोर होना चाहिए, उन्हें सामान्य शिक्षा मिलनी चाहिए,धार्मिक पुस्तकों को घर में पढ़ाना चाहिए। हिमंत बिस्व सरमा से जब यह कहा गया कि मदरसा में पढ़ने वाले छात्र बहुत होनहार होते हैं और वह कुरान के हर शब्द को आसानी से याद कर सकते हैं तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में सभी मुसलमान हिंदू हैं, कोई भी भारत में मुस्लिम पैदा नहीं हुआ, हर कोई हिंदू है। लिहाजा अगर कोई मुस्लिम बच्चा मेधावी है तो उसकी वजह हिंदू विरासत है।
यही नहीं सरमा ने कहा कि भारत में सभी मुसलमान हिंदू थे, भारत में कोई भी मुस्लिम पैदा नहीं हुआ है। यहां हर कोई हिंदू था। लिहाजा अगर कोई मुस्लिम बच्चा मेधावी है तो मैं उसके आंशिक तौर पर हिंदू होने का इसके लिए श्रेय दूंगा। बता दें कि असम सरकार ने 2020 में सभी सरकारी मदरसों को भंग करके उन्हें सामान्य शिक्षण संस्थान में बदल दिया था। हालांकि सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है। गुवाहाटी हाई कोर्ट में यह मामला लंबित है।












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