उत्तराखंड जैसी घटना का हिमाचल पर भी मंडरा रहा है खतरा, 1600 ग्लेशियल झील मचा सकती हैं तबाही

शिमला। Uttarakhand Glacier burst उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने की घटना के बाद मची तबाही का मंजर बहुत ही भयावह है। इस आपदा में अभी 200 के करीब लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 18 लोगों के शव अभी तक बरामद किए जा चुके हैं। आपको बता दें कि इसी तरह की घटना का खतरा पिछले कई सालों से हिमाचल प्रदेश पर भी मंडरा रहा है। दरअसल, हिमाचल में भी 1600 ग्लेशियल झीलें ऐसी हैं, जो पिघलकर कभी भी जबरदस्त तबाही मचाने की स्थिति में हैं।

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हिमाचल में भी 1600 ग्लेशियल झीलें बनी हुई हैं खतरा

आपको बता दें कि इन झीलों के बनने के पीछे की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग, जलवायु परिवर्तन और कुछ स्थानीय मुद्दे भी हैं, जैसे कि पेड़ों की कटाई इत्यादि। ये झीलें 5 से 10 हेक्टेयर में फैली हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल की स्थिति उत्तराखंड से बिल्कुल भी अलग नहीं है, हिमाचल में भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है। स्टेट सेंटर ऑन क्लाइमेट के एक वैज्ञानिक एसएस रंधावा का कहना है कि ये 1600 ग्लेशियल झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं, जो कि राज्य के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं। एस एस रंधावा ने कहा कि हालांकि इनकी नियमित निगरानी की जाती है, जिससे कि खतरे से पहले उसका अलर्ट जारी किया जा सके।

2005 में फट गई थी एक झील

साल 2005 में परछिऊ नदी उस वक्त उफान पर थी, जब भारी गर्मी की वजह से ग्लेशियर के पिछलने की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसके बाद सतलुज नदी में पानी का उफान आ गया।

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