Hijab Row: कर्नाटक हाई कोर्ट में आज फिर हुई सुनवाई, AG ने कहा- इस्लाम में हिजाब जरूरी नहीं
बेंगलुरु, 18 फरवरी। कर्नाटक हाई कोर्ट में हिजाब विवाद मामले पर शुक्रवार को भी सुनवाई हुई। न्यायालय में कर्नाटक सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने कहा कि इस्लाम में हिजाब जरूरी नहीं है। इससे पहले छात्राओं की तरफ से हिजाब के पक्ष में दलील दी गई थी। कोर्ट बारी-बारी से दोनों पक्षों की दलीलों को सुन रहा है। 14 फरवरी से लगातार इस मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है, जिस पर देश की ही नहीं बल्कि दुनिया की भी नजर है।
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शुक्रवार को सुनवाई के बीच एजी ने कहा, कर्नाटक सरकार का पक्ष ये है कि इस्लाम में हिजाब को जरूरी नहीं माना गया है। इस मामले पर सरकार ने तब दखल दिया जब हिजाब के उपयोग को लेकर मामला धार्मिक हो गया था। इस विवाद को लेकर विरोध जारी रहा, इसलिए 5 फरवरी को आदेश पारित किया गया था। अपने आदेश में राज्य सरकार ने कहा था कि छात्र-छात्राओं को कॉलेज की ओर से निर्धारित यूनिफॉर्म पहननी चाहिए। वहीं, महाधिवक्ता ने ये भी कहा कि राज्य सरकार धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहती है।
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उधर, सीनियर एडवोकेट एएम डार ने कोर्ट को बताया कि न्यायालय की आपत्ति को देखते हुए उन्होंने 5 छात्राओं की ओर से नई याचिका दायर की है। याचिका पर कोर्ट 21 फरवरी को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने कर्नाटक उच्च न्यायालय से लाइव-स्ट्रीमिंग कार्यवाही को बंद करने और निलंबित करने का आग्रह किया। कुमार का कहना है कि लाइव स्ट्रीमिंग प्रतिकूल साबित हो रही है। हालांकि कर्नाटक एचसी का कहना है कि लोगों को सुनने दें कि उत्तरदाताओं का मामले पर क्या रुख है।
कोर्ट ने सरकार से किया सवाल
हिजाब मामले पर सुनवाई शुरू होने पर कर्नाटक राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल ने बहस शुरू की उनका कहना है कि राज्य सरकार ने यह स्टैंड लिया है कि हिजाब इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथाओं के तहत नहीं आता है। इस बीच कर्नाटक हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार ने समय से पहले हिजाब पर रोक लगाने का आदेश दिया था? कोर्ट का कहना है, 'एक तरफ आप (राज्य) कहते हैं कि उच्च स्तरीय कमेटी मामले की जांच कर रही है, दूसरी तरफ आप यह आदेश जारी कर रहे हैं। कोर्ट का कहना है कि क्या यह राज्य का विरोधाभासी रुख नहीं होगा?












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