काशी-अमेठी बनी शतरंज़, मोदी के लिए रचा गया यह चक्रव्यूूह ...

narendra modi
वाराणसी/अमेठी। अब राजनीत‍ि उस दौर से दूर जा चुकी है, जब किसी दूसरे दल की मर्यादा के लिए एक दल अपना प्रत्याशी वहां से दूरी बना लिया करता था। नरेंद्र मोदी के अमेठी जाने के एलान से बौखलाई कांग्रेस अब मोदी को काशी में जवाब देने की तैयारी में है। काशी में मोदी को घेरने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है।

इस 'जैसे को तैसा' जवाब देने की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी गुलाम नबी आजाद खुद संभाल रहे हैं। आजाद की गिनती पार्टी के खांटी राजनेताओं में होती है। शोर-शराबे से दूर खामोशी से काम को अंजाम देने में विश्वास रखने वाले आजाद का टीम राहुल के हाई टेक अभियान के बजाय व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरणों पर ज्यादा फोकस है।

मोदी-दीदी की जंग

अमेठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए कड़ी चुनावी चुनौती से दो-चार पार्टी मोदी के अमेठी दौरे को लेकर हतप्रभ है। अभी तक अघोषित राजनीतिक शिष्टाचार के कारण एक-दूसरे के बड़े नेताओं के प्रति चुनाव प्रचार में न उतरने की परंपरा को मोदी ने अमेठी जाने का फैसला कर तोड़ दिया है।

मोदी के इस कदम से स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेताओं के माथे पर परेशानी के भाव बढ़ गए हैं। रायबरेली के मुकाबले अमेठी का चुनावी समर चुनौतीपूर्ण मान रही पार्टी मोदी की रैली को लेकर बेहद संजीदा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस भी इसका जवाब देने की तैयारी में है।

वाराणसी में पार्टी प्रत्याशी अजय राय के प्रचार में सोनिया और राहुल के आने को लेकर तेज होती मांग के बीच पार्टी ने संकेत दिए हैं कि सोनिया वाराणसी जा सकती हैं। हालांकि राय की छवि को लेकर पार्टी का एक बड़ा तबका अब भी इसके पक्ष में नहीं है।

राहुल-प्रियंका का रोड शो -

कांग्रेस उपाध्यक्ष और उनकी बहन प्रियंका गांधी ने रविवार को अमेठी में एकसाथ रोड शो किया। इस दौरान दोनों जनता से खुलकर मिले और उनका दुख-दर्द पूछा। रोड शो के दौरान राहुल-प्रियंका ने मीरशाह की मजार पर चादर भी चढ़ाई। चुनाव से पहले गांधी-नेहरू परिवार हमेशा से इस मजार पर चादर चढ़ाता रहा है।

कांग्रेसी चले गंगा नहाने -

मोदी के खिलाफ बोलकर कद बढ़ाने की कवायद में कांग्रेसी नेताओं में काशी जाने की होड़ लगी है। आलाकमान की नजरों में अहमियत पाने के लिए पार्टी नेता वहां जाकर पार्टी का प्रचार करना चाह रहे हैं। आजाद की निगरानी में चल रहे पार्टी के रणनीतिक प्रचार अभियान में फिट होने के लिए वे आलाकमान को अपनी उपयोगिता भी गिना रहे हैं।

काशी में मोदी को घेरने के लिए पार्टी ने 'माइक्रो मैनेजमेंट' रणनीति बनाई है। इसके तहत पार्टी छोटे-छोटे समूहों को अपने साथ जोड़ने और छोटी-छोटी टीमों के साथ समाज के विभिन्न वर्गो को साधने का प्रयास कर रही है। इन वर्गो को लुभाने के लिए पार्टी ने नेताओं की टुकड़ियां काशी में उतारने की शुरुआत कर दी है। मोहन प्रकाश, मोती लाल बोरा, आंनद शर्मा, करुणा शुक्ला, मनीष तिवारी, सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल जैसे नेता या तो वाराणसी पहुंच चुके हैं या जाने की प्रक्रिया में हैं।

नेताओं के इस अभियान से पार्टी को कितना फायदा मिलेगा यह तो चुनाव परिणाम बताएगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि इनका मोदी के खिलाफ ताल ठोकना चुनाव बाद होने वाली समीक्षा में उनके काम आएगा।

अमेठी नहीं जाएंगी सोनिया -

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी अमेठी में नहीं होंगी। माना जा रहा है कि मोदी से टकराव टालने के लिए यह निर्णय लिया गया है। पहले सोनिया और मोदी दोनों की ही सोमवार को अमेठी में रैली होनी थी।

भाजपा ने बेहद चालाकी से मोदी की रैली का कार्यक्रम सोनिया की रैली के बाद रखा था। माना जा रहा था कि सोनिया की रैली पहले होने के कारण मोदी उनके भाषण को निशाने पर लेने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। शाम 5 बजे चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा और ऐसे में कांग्रेस के पास मोदी के आरोपों व सवालों का जवाब देने का समय नहीं रहेगा।

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