... यहां बीजेपी से खुलकर समर्थन मांग रही है कांग्रेस

मंगलवार को प्रस्तावित चुनाव में जीत हासिल करने को तीनों दलों के उम्मीदवार पार्टी लाइन से हटकर दूसरे दलों में अपनी बिरादरी के पार्षदों से समझौते कर रहे हैं। इसके चलते भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी परेशान है।
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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है। बीएसपी ने वर्षों तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का साथ दिया और उसका भाजपा से छत्तीस का आंकड़ा रहा। मगर, नगर निगम में ऐसा नहीं है।
कुर्सी के लिए बीजेपी के साथ आई बसपा -
बीएसपी ने एक बार फिर डिप्टी मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया है। वह मेयर व अन्य पदों पर भाजपा का साथ देगी, जबकि भाजपा डिप्टी मेयर पद पर बसपा पार्षद उम्मीदवार को जिताएगी। पिछले दो वर्ष के दौरान भी ऐसा हो चुका है।
उधर, मेयर व डिप्टी मेयर पद के साथ ही कांग्रेस ने स्थायी समिति के दो पदों पर भी अपना उम्मीदवार उतार रखा है। सूत्रों के अनुसार मेयर पद का उम्मीदवार तय करने के निर्णय को लेकर भाजपा के कुछ पार्षद नाराज हैं।
बीजेपी से वोट मांग रहे कांग्रेस पार्षद -
इसी तरह बसपा में भी डिप्टी मेयर का उम्मीदवार तय करने में नाराजगी है। लेकिन बसपा के नेता अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस व अन्य दलों के पार्षदों से तालमेल भी बना रहे हैं।
बसपा नेता मेयर पद पर अपनी सहयोगी भाजपा के बजाए कांग्रेस का साथ देने का आश्वासन दे रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस के कुछ पार्षद भाजपा के पार्षदों से डिप्टी मेयर पद पर वोट मांग रहे हैं। वे यह कोशिश अपनी बिरादरी के पाषदों से मिलकर कर रहे हैं। वाकई दिलचस्प है नजारा जहां प्रमुख दल एक-दूसरे की थाली पर नजर गढ़ाए हैं व मौका मिलते ही सब चट कर जाना चाहते हैं।












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