द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार चुनकर भाजपा ने कैसे साधा राष्ट्रपति चुनाव का गणित, जानिए
नई दिल्ली, 22 जून। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार घोषित किया है। एनडीए के इस चयन को कूटनीतिक तौर पर बड़ा दांव माना जा रहा है। दरअसल एनडीए को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए कुछ अन्य दलों के समर्थन की जरूरत थी, ऐसे में आदिवासी समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू के नाम के ऐलान को काफी अहम माना जा रहा है। द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान करने के बाद एनडीए के बाहर के कुछ दलों को उनका समर्थन करना मजबूरी होगा। कुछ ऐसा ही दांव यूपीए ने प्रतिभा पाटिल के नाम के ऐलान के साथ चला था।
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13000 अतिरिक्त वोटों की जरूरत
दरअसल एनडीए को अपने उम्मीदार को जिताने के लिए 13000 अन्य वोटों की जरूरत है,ऐसे में उसे दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। इस लिहाज से वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल का वोट काफी अहम हो गया था। हालांकि भाजपा को उम्मीद थी कि ये दोनों दल उसे अपना समर्थन दे सकते हैं, लेकिन द्रौपदी मुर्मू के नाम के ऐलान के साथ एनडीए ने दोनों दलों पर एक नैतिक दबाव डाला है। बता दें कि बीजेडी के पास 43000 से अधिक वोट हैं जबकि वाईएसआर के पास 43000 से अदिक वोट हैं। अहम बात यह है कि हाल ही में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान द्रौपदी मुर्मू के नाम पर चर्चा हुई थी। इन दोनों ही दलों ने 2017 में भी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रामनाथ कोविंद का समर्थन किया था।
नवीन पटनायक से पीएम मोदी की मुलाकात
खुद नवीन पटनायक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे द्रौपदी मुर्मू के नाम को लेकर चर्चा की थी। नवीन पटनायक ने ट्वीट करके लिखा, द्रौपदी मुर्मू जी को एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चयन होने पर बधाई। मैं इस बात को लेकर काफी खुश था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे साथ इसको लेकर चर्चा की थी। यह ओडिशा के लोगों के गर्व का पल है। मुझे पूरा भरोसा है कि द्रौपदी मुर्मू जी देश में महिला सशक्तिकरण का चमकता हुआ उदाहरण बनेंगी।
भाजपा का मास्टर स्ट्रोक
भारतीय जनता पार्टी के इस फैसले को रणनीतिक तौर पर मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। भाजपा किसी ऐसे उम्मीदवार के नाम का ऐलान करना चाहती थी, जिसका समर्थन करना कुछ दलों के लिए नैतिक मजबूरी बन जाए। भाजपा ने यूपीए की रणनीति का अनुसरण करते हुए ही द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान किया था। यूपीए की ओर से जब प्रतिभा पाटिल के नाम का ऐलान किया गया था तो शिवसेना और एनसीपी को उनका समर्थन करना मजबूरी बन गया था। दरअसल प्रतिभा पाटिल महाराष्ट्र से ही आती हैं, ऐसे में मराठी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करना दोनों ही दलों के लिए मुश्किल हो सकता था। कुछ ऐसा ही दांव द्रौपदी मुर्मू के साथ भाजपा ने चला है। ओडिशा के आदिवासी समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करना नवीन पटनायक के लिए नौतिक मजबूरी भी है। ऐसे में माना जा रहा है कि द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना लगभग अब तय है।












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