भारतीय बाजारों में बिक रहे हट्टे-कट्टे पर जहरीले मुर्गे
नई दिल्ली। अगर आप चिकन बिरयानी देख खुद को रोक नहीं पाते हैं, चिकन कबाव, चिकन कोरमा, चिकन हैदराबादी आपकी फेवरेट दिश हैं, तो खुद पर कंट्रोल कीजिये, क्योंकि जो चिकन भारत के विभिन्न शहरों में बिक रहा है, वो जहरीला है। नॉन वेज के शौकीन लोग इस जहर को चाव से खा रहे हैं और अपने बच्चों को भी खिला रहे हैं।
वो ऐसे कि पोल्ट्री फार्म में जो खाना मुर्गों को दिया जाता है, उसमें ऐसी दवाएं मिलायी जाती हैं, जो चिकन खाने वालों को बीमारियां बांटने के लिये काफी हैं। असल में चिकन को मोटा तगड़ा करने के लिये उन्हें एंटी बायोटिक दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं कितनी खतरनाक हैं पढ़ें इन बिंदुओं में-
- भारत दुनिया के उन शीर्ष पांच देशों में से एक है, जहां जानवरों के भोजन में एंटीबायोटिक दवाएं मिलायी जाती हैं।
- पोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के अनुसार अगले 15 साल में एंटीबायोटिक लेने वालों की संख्या दुगनी हो जायेगी।
- वहीं चिकन के जरिये नॉनवेजीटेरियन लोगों के शरीर में पहुंचने वाली एंटीबायोटिक की मात्रा 143 प्रतिशत तक बढ़ जायेगी।
- मुर्गों को एंटीबायोटिक दवाएं देकर बड़ा करना गैर कानूनी है, इसके बावजूद धड़ल्ले से यह काम जारी है।
- एंटीबायोटिक जो दी जा रही हैं- बेसिट्रासिन, टाइलोसिन, फूराजोलिडोन, लीसोमाइसिन, कोलिस्टनि सलफेट, डॉक्सीक्लीन, मेट्रानिजेडोल।
- ये एंटीबायोटिक अधिक मात्रा में लिये जाने से व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर कर देती हैं।
- दक्षिण कोरिया ने चिकन को एंटीबायोटिक्स देकर बड़ा करने के काम पर प्रतिबंध लगा दिया है।
अगर इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो भारत में चिकन खाने वाले लोगों का इम्यूनि सिस्टम यानी प्रतिरक्षण प्रणाली इतनी कमजोर हो जायेगी, कि साधारण बुखार आने पर भी दवा असर करना बंद कर देगी। [पढ़ें- मासिक धर्म कोई अपराध नहीं.. बदल रही है सोच]
नोट- इस खबर में इनपुट इंडिया स्पेंड डॉट ओआरजी से लिये गये हैं।













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