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शादी के बाद इंदिरा गांधी ने किया इस्लाम धर्म स्वीकार?

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नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या फिरोज गांधी मुसलमान थे और इंदिरा गांधी ने निकाह के समय मुस्लिम धर्म स्वीकार किया था ? हैदराबाद से प्रकाशित होने वाले प्रतिष्ठित उर्दू अखबार 'दैनिक मुंसिफ ने इस तरह का दावा किया है।

Indira Gandhi

लेख में नेहरू डायनेस्टी के लेखक के एन.राव के हवाले से दावा किया गया कि इंदिरा और फिरोज ने लंदन में एक मस्जिद में जाकर निकाह कर लिया था और इंदिरा को मुसलमान धर्म स्वीकार करना पड़ा।

वैदिक पद्धति से शादी

जब इस बात की सूचना महात्मा गांधी को मिली तो उन्होंने इन दोनों को भारत बुला कर वैदिक पद्धति से उनकी शादी करवा दी। फिरोज जहांगीर खान का नाम बदलकर फिरोज गांधी कर दिया गया। 1942 में राजीव के जन्म के बाद दोनों पति-पत्नी अलग हो गए थे। मोहम्मद यूनुस ने अपनी पुस्तक में लिखा था कि संजय गांधी का मुसलमान ढंग से खतना किया गया था। फिरोज गांधी के पिता जहांगीर खान मुसलमान थे। जबकी उनकी मां रत्तीमाई जो कि पहले पारसी थी, बाद में मुसलमान बन गई थी। फिरोज गांधी की कब्र इलाहाबाद के कब्रिस्तान में मौजूद है जबकि पारसियों की कब्र नहीं बनाई जाती।

बाबा के नाम से परहेज

इस लेख में एक तरह से सवाल पूछा गया कि वरुण गांधी तक ने अपने नाम के साथ इंदिरा, नेहरू शब्द तो जोड़े पर कभी अपने बाबा के नाम से खुद को नहीं जोड़ा। वैसे कुछ कांग्रेस नेता उन्हें याद करते रहते थे और हर साल अपना पैसा खर्च करके किसी रेस्टोरेंट में उनके जन्मदिन पर छोटी सी पार्टी कर लेते थे। इनमें से एक दिवंगत ब्रजमोहनजी भी थे।

फिरोज थे नापसंद

मुंसिफ में छपे लेख में दावा किया गया है कि फिरोज गांधी के ससुर जवाहरलाल नेहरू उन्हें सख्त नापसंद करते थे। मूंधरा कांड, जीप घोटाले सरीखे नेहरू सरकार के भ्रष्टाचार के मामले उठाने के कारण, जवाहरलाल नेहरू उनसे काफी नाराज थे।

लेखक ने आगे यह भी दावा किया है कि 12 सितंबर 2012 को फिरोज गांधी की जन्म शताब्दी थी मगर उन्हें केंद्र में सत्तारुढ़ कांग्रेस सरकार ने याद करने की कोई जरुरत नहीं समझी। ऐसा प्रतीत होता है कि फिरोज गांधी के परिवारजनों ने उन्हें भुला दिया है या वह जानबूझकर उनका उल्लेख नहीं करना चाहते।

फिरोज गांधी नदरअंदाज

आखिर क्या कारण है कि राजीव गांधी और इंदिरा गांधी की वर्षगांठ पर समाचार पत्रों को 8-8 करोड़ के विज्ञापन देने वाली सरकार फिरोज गांधी को बिल्कुल नजरअंदाज क्यों करती रही। हालांकि उस समय सत्ता की बागडोर फिरोज गांधी की पुत्रवधु सोनिया के हाथों में थीं। लेखक ने इस बात पर हैरानी व्यक्त की है कि फिरोज गांधी को शुरु से ही उसका परिवार नजरअंदाज करता रहा है। उनके नाम पर न तो किसी मार्ग का नाम रखा गया है और न ही कोई योजना बनाई गई है। जबकि सैकड़ों जगहें राजीव और इंदिरा गांधी व जवाहरलाल नेहरू के नाम से जुड़ी हुई है। मगर फिरोज गांधी का कोई नाम लेने वाला नहीं है।

कुछ वर्ष पूर्व की बात है कि राहुल गांधी इलाहाबाद के दौरे पर गए थे तो रात के अंधेरे में वह फिरोज गांधी की कब्र भी देख आए। यह समाचार सिर्फ एक पारसी समाचारपत्र ने ही प्रकाशित किया था। फिरोज गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और उनसे खुद जवाहरलाल नेहरू भयभीत रहते थे। फिरोज गांधी अनेक बार लोकसभा के सदस्य चुने गए।

फिरोज गांधी को भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाला पहला व्यक्ति माना जाता है। उन्होंने अपने युग के आर्थिक घोटाले का पर्दाफाश किया था और उसके कारण तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी को इस्तीफा देना पड़ा था। फिरोज के इस रवैये से नेहरू बहुत परेशान थे। 1960 में जब फिरोज गांधी का निधन हुआ तो दोनों ने चैन की सांस ली।

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English summary
Has Indira Gandhi embraced Islam after her marriage ? A Urdu newspaper Munsif claims.
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