G20 में राष्ट्रपति के रात्रिभोज का 'अप्रत्यक्ष बहिष्कार' कर कांग्रेस ने क्या अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है?
जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे विदेशी मेहमानों के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से आयोजित डिनर को लेकर कांग्रेस अभी तक बुरी तरह से दुविधा में नजर आ रही है। पार्टी के अंदर मची उथल-पुथल की ताजा बानगी लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी के बयानों में देखने को मिली है।
चौधरी को राष्ट्रपति मुर्मू से निमंत्रण पाकर जी20 डिनर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का पहुंचना नागवार गुजरा है। उन्होंने ममता को लेकर कहा है, 'अगर वह डिनर में नहीं पहुंचतीं तो कुछ हो नहीं जाता। आसमान नहीं गिर जाता। महाभारत अपवित्र नहीं होता...कुरान नहीं अपवित्र हो जाता....'

डिनर की दुविधा से कब उबरेगी कांग्रेस?
लेकिन, कांग्रेस नेता यह भूल गए कि देश की राष्ट्रपति की ओर से आयोजित जिस डिनर के लिए वे टीएमसी चीफ को कोस रहे हैं, उसमें खुद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी पहुंचे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे काफी गर्मजोशी से मिल रहे थे।
कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्री डिनर से रहे दूर
अलबत्ता कांग्रेस के तीन अन्य मुख्यमंत्री- अशोक गहलोत (राजस्थान), सिद्दारमैया (कर्नाटक) और भूपेश बघेल अलग-अलग वजह बताकर इसमें नहीं पहुंचे। इनमें से कुछ की ओर से कहा गया कि सुरक्षा कारणों से दिल्ली एयरपोर्ट पर उनके विमानों के उतरने में दिक्कत थी, जिसका सरकार की ओर से खंडन भी कर दिया गया था।
खड़गे को नहीं बुलाने की शिकायत कर रही है कांग्रेस
जी20 शिखर सम्मेलन जैसे वैश्विक आयोजन में भारत सरकार की ओर से आयोजित इस डिनर को लेकर कांग्रेस की ओर से एक मुद्दा शुरू से उठाने की कोशिश की गई कि पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को क्यों नहीं बुलाया गया? यह शिकायत राहुल गांधी ने भी की। कई तरह के सियासी कार्ड चलने की कोशिश हुई।
ममता, नीतीश, स्टालिन ने कांग्रेस की शिकायत को अनसुना किया
तथ्य यह है कि इस समय देश में इंडिया गठबंधन में जितनी भी पार्टियां शामिल हैं, उनमें से कुछ नेता पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ अपनी मुखरता के लिए ही सुर्खियों में रहते हैं। इनमें ममता बनर्जी ही नहीं, बिहार के सीएम नीतीश कुमार और तमिलाडु के सीएम एमके स्टालिन भी शामिल हैं। लेकिन, ये तीनों ही इस रात्रिभोज का बड़े ही गर्व से हिस्सा बने।
अब कांग्रेस की ओर से विपक्षी दलों के नेताओं पर जिस तरह से तंज कसने की कोशिश की गई है, उसको लेकर ममता की एक सहयोगी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है, 'हम हर मुद्दे पर कांग्रेस की लाइन के आधार पर नहीं चल सकते। भारत के राष्ट्रपति की ओर से आयोजित जी20 डिनर में राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है.....' नीतीश ने भी यही कहा है कि वे भारत के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर डिनर में शामिल हुए।
'जी20 डिनर से अलग रहना उचित नहीं'
एक और गैर-कांग्रेसी नेता ने नाम जाहिर नहीं होने देने की शर्त पर कहा था, 'नेताओं के लिए जी20 डिनर से अलग रहना उचित नहीं है......निमंत्रण भारत के राष्ट्रपति की ओर से आया और यह एक सरकारी कार्यक्रम है।' एक कांग्रेस नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया है कि पार्टी हाई कमान ने किसी को डिनर से दूर रहने को नहीं कहा, बल्कि 'फैसला मुख्यमंत्रियों पर छोड़ दिया गया।'
बीजेपी ने इस मसले पर आधिकारिक रूप से बयानबाजी से दूरी बनाने की कोशिश की है, लेकिन पार्टी से जुड़े लोगों ने खड़गे को नहीं बुलाए जाने की दलील पर यह जवाब दिया कि इसमें तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी नहीं बुलाया गया। पार्टी के लोगों की ओर से यह भी कहा गया कि कांग्रेस अगर ऐसे राष्ट्रीय मसले पर भी राजनीति करना चाहती है, तो यह उसकी समस्या है।
15 अगस्त के मुख्य समारोह से दूर रहने का भी दिया हवाला
यही नहीं बीजेपी से जुड़े लोगों ने 15 अगस्त जुड़ी वो तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं, जिसमें लाल किले के मुख्य कार्यक्रम में तो राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे की कुर्सी खाली थी, लेकिन कांग्रेस की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में वे शामिल हुए थे।
इस तरह से यह ऐसा मसला है, जिसमें कांग्रेस इंडिया गठबंधन में भी अलग-थलग पड़ी नजर आई है और खुद उसकी चारों राज्य सरकारों में भी तालमेल का अभाव दिखा है। एक तरफ जहां कांग्रेस विपक्षी इंडिया गठबंधन की अगुवा बनने की मंसूबा पाले है, उसमें आसानी से सहयोगी दलों का किसी मुद्दे पर उससे छिटक जाना, आगे की जोरदार लड़ाई के लिए अच्छा संकेत तो नहीं कहा जा सकता।












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