Operation Sindoor पर बयान देना पड़ा भारी, महिला आयोग ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को किया तलब

Operation Sindoor: सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के एक एसोसिएट प्रोफेसर को हरियाणा राज्य महिला आयोग से नोटिस मिलने के बाद तलब किया गया है। आरोप है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर वाले बयान में सशस्त्र बलों में महिलाओं का अपमान करने और सांप्रदायिक विद्वेष को बढ़ावा देना। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की टिप्पणी को लेकर बवाल मच गया है।

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब कर्नल सोफिया कुरैशी (Colonel Qureshi ) और विंग कमांडर व्योमिका सिंह (Wing Commander Vyomika Singh) मीडिया के सामने आईं, तो हर कोई उनकी बहादुरी का सम्मान कर रहा था। लेकिन, अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) के प्रोफेसर महमूदाबाद ने इसे 'दिखावटी' बता दिया और कहा कि यह सब 'पाखंड' है अगर जमीनी सच्चाई नहीं बदली। उन्होंने दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों से यह भी कहा कि अगर वे महिला अधिकारियों की तारीफ कर रहे हैं, तो उन्हें बुलडोजर न्याय और लिंचिंग के शिकार मुसलमानों की भी सुरक्षा की मांग करनी चाहिए।

Operation Sindoor

महिला आयोग ने क्यों उठाया कदम?

हरियाणा महिला आयोग ने इस टिप्पणी को गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (Ali Khan Mahmudabad) ने न सिर्फ सेना में महिलाओं की भूमिका का अपमान किया है, बल्कि सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की भी कोशिश की है। आयोग के अनुसार, उनकी बातों में बार-बार 'नरसंहार', 'अमानवीयकरण' और 'पाखंड' जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जो सरकार और सेना पर दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने की कोशिश लगती है।

आयोग ने क्यों कहा- ये 'राष्ट्रीय एकता के खिलाफ' है?

आयोग ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई को बदनाम करने का यह प्रयास है, और इससे आम जनता में भ्रम और तनाव पैदा हो सकता है। साथ ही, यूजीसी रेगुलेशन्स 2018 के तहत शिक्षकों से अपेक्षित मर्यादाओं का उल्लंघन भी माना गया है।

अब क्या होगा?

हरियाणा महिला आयोग ने प्रोफेसर को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। उनसे पूछा जाएगा कि क्या यह बयान शिक्षकों के दायित्व के अनुरूप था? और क्या इससे सामाजिक सद्भाव को चोट नहीं पहुंची?

क्या है यूजीसी रेगुलेशन 2018 का नियम?

यूजीसी (UGC) रेगुलेशन्स 2018 के मुताबिक, किसी भी शिक्षक को ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहिए जो समाज में नफरत, भ्रम या तनाव फैलाए। इस मामले में आयोग का मानना है कि प्रोफेसर का बयान इन नियमों का उल्लंघन करता है।

देश की सुरक्षा और वीर सैनिकों के योगदान पर कोई भी सवाल उठाने से पहले जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की ज़रूरत है। खासकर जब बात महिलाओं की भूमिका और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों की हो, जो देश की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम साबित हुए हैं।

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