क्या Harsh Mander CBI जांच का सामना करेंगे? गृह मंत्रालय ने अनुशंसा की, FCRA कानून के उल्लंघन का आरोप
पूर्व आईएएस और एक्टिविस्ट हर्ष मंदर के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार FCRA कानून के उल्लंघन का आरोप लगने के बाद गृह मंत्रालय ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता / एक्टिविस्ट के रूप में लोकप्रिय हर्ष मंदर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच का सामना कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी सूत्रों ने कहा है कि FCRA कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंदर के एनजीओ के खिलाफ सीबीआई जांच की अनुशंसा की है।
Harsh Mander CBI जांच के दायरे में कैसे
समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया,"गृह मंत्रालय (MHA) ने कथित एफसीआरए उल्लंघन के लिए आईएएस से सामाजिक कार्यकर्ता बने हर्ष मंदर के एनजीओ अमन बिरादरी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की है।" हर्ष मंदर के NGO के खिलाफ गृह मंत्रालय की तरफ से सीबीआई जांच की सिफारिश का कदम बेहद अहम समय पर लगभग दो साल बाद सामने आया है। दो साल पहले दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक्स ऑफेंस विंग ने मंदर और इनसे जुड़ी संस्थाओं पर FIR दर्ज किया था।
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CBI जांच की सिफारिश के बाद क्या होगा?
सरकारी सूत्र के हवाले से आई इस खबर में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010 (FCRA) के उल्लंघन और सीबीआई जांच की अनुशंसा पर समाचार एजेंसी ANI के अनुसार नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी सूत्र ने बताया कि गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद मंदर के एनजीओ अमन बिरादरी के खिलाफ जांच की जाएगी।
Harsh Mander ED की जांच का सामना कर चुके हैं
गौरतलब है कि हर्ष मंदर इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर चुके हैं।सितंबर, 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। मंदर का नाम फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भी सामने आया था।
FEMA के तहत लाखों रुपये जब्त किए जा चुके हैं
इस कार्रवाई के बारे में ईडी ने बताया था कि तलाशी अभियान के दौरान पॉल मर्चेंट्स लिमिटेड और अन्य के पास से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के तहत चंडीगढ़, पंचकुला, मोहाली, जालंधर और दिल्ली में और 3.88 करोड़ रुपये की मुद्रा और 24.2 लाख रुपये के बुलियन जब्त किए गए। ईडी ने फेमा, 1999 के तहत चंडीगढ़, पंचकुला, मोहाली, जालंधर और दिल्ली में मैसर्स पॉल मर्चेंट्स लिमिटेड और अन्य के कार्यालय और आवासीय परिसरों पर भी तलाशी अभियान चलाया था।
क्या हर्ष मंदर कांग्रेस के करीबी हैं?
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार में राष्ट्रीय सलाहकार समिति को सबसे शक्तिशाली क्लब माना जाता था। इस समिति में 2010 से 2012 तक सोनिया गांधी के साथ मिलकर काम करने के आधार पर हर्ष मंदर को कांग्रेस का करीबी और हमदर्द भी कहा जाता है।
हर्ष मंदर की NGO क्या करती है?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अमन बिरादरी NGO की वेबसाइट पर उल्लेख किया गया है कि यह एक धर्मनिरपेक्ष, शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और मानवीय दुनिया के लिए लोगों का अभियान है। इसका उद्देश्य गांव और जिला स्तर पर स्थानीय स्तर की संस्थाओं के निर्माण के माध्यम से विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच सहिष्णुता, बंधुत्व, सम्मान और शांति के आपसी बंधन को मजबूत करना है। इसके लिए विभिन्न पृष्ठभूमि जाति और भाषा समूह और पंथ को मानने वाले लोगों में से मुख्य रूप से युवाओं और महिलाओं को एकजुट करना है।
NGO का दावा- राष्ट्र की सच्ची भावना के अनुरूप काम कर रहे
एनजीओ की वेबसाइट पर लिखे विवरण में दावा किया गया है कि राष्ट्र की सच्ची भावना के अनुरूप अमन बिरादरी अपनी गतिविधियों के माध्यम से समान नागरिकता, न्याय, सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और समाज के बहुत ही जमीनी स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को सेलिब्रेट करने के साथ इन्हें बढ़ावा देता है।
दो साल पहले दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 2021 में मंदर के अन्य एनजीओ सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (सीईएस) और उसके अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406, 409, 420, 120बी के तहत मामला दर्ज किया था। मंदर इसके निदेशक हैं। एफआईआर क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के तहत दर्ज की गई है।
मंदर से जुड़ी संस्थाओं पर NCPCR के गंभीर आरोप
दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की एक निरीक्षण रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें एनजीओ द्वारा स्थापित आश्रय गृहों में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होने का दावा किया गया। एक शेल्टर होम में कथित तौर पर बाल यौन शोषण का भी मामला भी सामने आया था। सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज पर आरोप लगा कि शेल्टर होम की आर्थिक मदद के अलावा रेनबो फाउंडेशन ऑफ इंडिया (RFI), एसोसिएशन फॉर रूरल एंड अर्बन नीडी (ARUN-India), कैन असिस्ट सोसाइटी के 'दिल से कैंपेन' और अमन बिरादरी की फंडिंग भी की जा रही थी।
क्या है हर्ष मंदर का बैकग्राउंड
बता दें कि हर्ष मंदर दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। 2002 के गुजरात दंगों के बाद उन्होंने आईएएस अधिकारी के रूप में पद छोड़ दिया था। मंदर भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के 17 साल बाद विकलांग व्यक्तियों की गरिमा, भोजन का अधिकार, आदिवासी और दलित महिलाओं की सुरक्षा, और लिंचिंग के पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे मुद्दों की लड़ाई को अपना मिशन बनाने वाले मंदर ने एनजीओ बनाने का फैसला लिया।












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