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निर्भया केस में 1 फरवरी को भी नहीं होगी चारों हत्‍यारों को फांसी, जानें खास वजह

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बेंगलुरु। 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप और हत्‍या के मामले में निर्भया के चार दोषियों की फांसी की तारीख आने में महज चार दिन शेष हैं। लेकिन संवैधानिक विकल्प और प्रशासनिक पेचीदगियां ऐसी फंस रही कि जिनके कारण एक बार फिर फांसी की तारीख टल जाएगी और निर्भया के चारों दोषियों की चंद सांसें और बढ़ जाएगी। अब तक निर्भया के माता-पिता सात सालों तक तारीख पर तारीख को लेकर परेशान थे, लेकिन कानूनी हथकंडों की वजह से निर्भया को इंसाफ मिलने की आस में वाे ही नहीं पूरे देश के लोग फांसी पर तारीख और तारीख बढ़ने से हैरान हैं।

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खुद अदालत ने कहा कि हम इन कानूनी प्रावधानों और दोषियों को अपने बचाव के लिए मिले कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की वजह से इनकी सजा पर अमल को टाल रहे हैं। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट में उपचारात्मक याचिका या फिर राष्ट्रपति के पास दया याचिका लंबित होगी तो डेथ वारंट पर अमल नहीं किया जा सकेगा। जानिए इस बार दरिंदों की फांसी टलने की क्या हैं खास वजहें?

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बता दें पटियाला हाउस कोर्ट ने मुकेश की राष्‍ट्रपति द्वारा दया याचिका रद्द किए जाने के बाद 14 दिनों बाद ही फांसी दिए जाने की कानूनी मजबूरियों की वजह से फांसी की तारीख टाल कर कुछ दिनों पूर्व नया डेथ वारंट जारी किया था। इस वारंट के अनुसार 1 फरवरी सुबह 6 बजे इन चारों दोषियों को फांसी होनी हैं। लेकिन निर्भया के एक दोषी ने फांसी से बचने के लिए नयी चाल चल दी हैं और बाकी तीन इसकी तैयारी कर चुके हैं।

दोषी मुकेश की इस चाल से टलेगी फांसी

दोषी मुकेश की इस चाल से टलेगी फांसी

फांसी को टालने के लिए निर्भया केस में मौत की सजा पा चुके एक दोषी मुकेश कुमार की ओर से पिछले शनिवार को उसकी वकील वृंदा ग्रोवर ने पिछले शनिवार को राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देते हुए इसकी न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। बता दें ये वहीं मुकेश हैं जिसकी दया याचिका राष्‍ट्रपति द्वारा खारिज की जा चुकी हैं और जिसके कारण फांसी की तारीख 22 जनवरी से टाल कर 1 फरवरी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुकेश के वकील की इस याचिका को स्‍वीाकर करते हुए तत्काल सुनवाई के लिए तैयार हो गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मुकेश के वकील को रजिस्ट्री के सामने मेंशन करने को कहा है। मुकेश ने इस अर्जी में 1 फरवरी के लिए जारी डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग भी की है। इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने इस मसले पर कहा है कि अगर किसी को 1 फरवरी को फांसी की सजा होने वाली है तो जाहिर है कि उसकी याचिका पर सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

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फैसला आने तक नहीं हो सकती फांसी

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मुकेश की वकील ग्रोवर ने यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के शत्रुघभन चौहान मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया गया है। ग्रोवर ने शत्रुघ्न चौहान प्रकरण में शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इन मानकों में ऐसे कैदी को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की अनिवार्यता भी शामिल है। बता दें सुप्रीम कोर्ट ने शत्रुघ्न चौहान मामले में दिए गए अपने फैसले में दया याचिका अरसे तक लंबित रहने के मद्देनजर कहा था, लंबा इंतजार दोषियों के लिए मानसिक प्रताड़ना के समान है। कोर्ट ने कहा था कि डेथ वारंट जारी होने और फांसी देने के बीच कम से कम 14 दिन का अंतराल होना चाहिए। जब तक इस केस में कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुना देती तब तक फांसी नहीं दी सकती ।

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यह था 2014 का शत्रुघ्न चौहान मामला

यह था 2014 का शत्रुघ्न चौहान मामला

सुप्रीम कोर्ट ने शत्रुघ्न चौहान मामले में दिए गए अपने फैसले में दया याचिका अरसे तक लंबित रहने के मद्देनजर कहा था, लंबा इंतजार दोषियों के लिए मानसिक प्रताड़ना के समान है। कोर्ट ने कहा था कि डेथ वारंट जारी होने और फांसी देने के बीच कम से कम 14 दिन का अंतराल होना चाहिए। बीते 22 जनवरी को गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 2014 के शत्रुघ्न चौहान मामले के फैसले को स्पष्ट करने की मांग की है।

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 वकील जानबूझ कर रहे ये देर

वकील जानबूझ कर रहे ये देर

इतना ही नहीं चारों दोषियों की कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की फाइलें अलग-अलग जगह हैं। मुकेश और विनय की सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। लेकिन निर्भया के दोषी पवन और अक्षय के साथ विनय की ओर से उसके वकील एपी सिंह कोर्ट में कयूरेटिव प्रीटिशन डालने की तैयारी कर चुके हैं। दोषियों के वकील एपी सिंह ने क्यूरेटिव प्रीटिशन दायर करने के बजाय केस में देरी हो इसके लिए शुक्रवार को पटियाला हाउस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था इस बार वकील ने याचिका दायर करके तिहाड़ जेल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि दोषियों के लिए क्यूरेटिव और दया याचिका दायर करने के लिए जरूरी दस्तावेज देने में देरी की जा रही है। हालांकि ये केस कोर्ट ने खारिज कर दिया है। तीनों ऐसे ही कई तरह के हथकंडों के जरिए पहले तो सुधारात्मक याचिका यानी क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने में ही हर संभव देरी करेंगे। जब कि दिल्ली हाई कोर्ट कुछ दिनों पूर्व निर्भया केस के दोषी मुकेश की अर्जी में सुनवाई करते हुए सख्‍त लहजे में पूछा था कि जब 2017 में ही सुप्रीम कोर्ट ने आपकी रिट एसएलपी खारिज कर दी थी तो ढाई साल तक आप हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे। इस दौरान आपने रिव्यू और क्यूरेटिव क्यों दाखिल नहीं की। इसके बावजूद दोषी के वकील ये चाल चल रहे।

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क्यूरेटिव याचिका के बाद भी बचे हैं कई विकल्प

क्यूरेटिव याचिका के बाद भी बचे हैं कई विकल्प

क्यूरेटिव खारिज होने के बाद दया याचिका लगाने और उसके खारिज होने की स्थिति में भी एक बार फिर अदालत में चुनौती देने का अंतिम विकल्प उनके पास रहेगा। कयास लगाए जा रहे थे कि चार दोषियों में से कोई राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर फांसी की को टालने की कोशिश करेगा। दया याचिका खारिज होने की हालत में भी डेथ वारंट को चुनौती देने का विकल्प भी है। हालांकि अभी भी याचिका का विकल्प दोषियों के पास है लेकिन अब तक दोषियों के वकील ने ऐसी कोई पहल नहीं की है।

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पवन के पिता की पुर्नविचार याचिका को कोर्ट ने किया खारिज

पवन के पिता की पुर्नविचार याचिका को कोर्ट ने किया खारिज

वहीं निर्भया के पवन गुप्‍ता नामक दोषी पवन के पिता ने सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या मामले में एकमात्र गवाह यानी निर्भया के दोस्त की गवाही को चुनौती पटियाला हाउस कोर्ट में दी थी। इस केस में फिलहाल सत्र न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रखा था उसमें फैसला सोमवार को सुनाते हुए पुर्नविचार याचिका खारिज कर दी है। गौरतलब है कि दोषी पवन गुप्ता के पिता ने इस याचिका में मजिस्ट्रेट के उस फैसले को चुनौती दी थी। जिसमें ऐसी ही उनकी एक पूर्व याचिका खारिज कर दी गई थी।मामले में दोषी पवन गुप्ता के पिता हीरालाल गुप्ता ने अर्जी दायर कर आरोप लगाया है कि निर्भया के दोस्त व मामले में एकमात्र गवाह अवनींद्र ने पैसे लेकर मीडिया चैनलों को साक्षात्कार दिए जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई।

ऐसी ही एक याचिका पवन के पिता ने पहले भी डाली थी जिसे पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी सुधीर कुमार सिरोही ने सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दिया। दंडाधिकारी सुधीर कुमार सिरोही ने कहा था कि याचिका में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि मामले की जांच प्रभावित हुई। इसलिए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट के समक्ष पवन के पिता हीरालाल गुप्ता के वकील एपी सिंह ने कहा कि युवक के साक्षात्कारों से प्रतीत होता है कि वह दोषियों को फांसी पर लटका देखना चाहता है। हालांकि पटियाला हाउस कोर्ट ने दोबारा भी इस मामले पवन के पिता की अर्जी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए याचिका को सोमवार यानी आज ही खारिज कर दिया है।

क्या हैं निर्भया केस

क्या हैं निर्भया केस

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में पैरामेडिक की छात्रा और उसका एक दोस्त एक बस में सवार हुए थे। उस बस में छात्रा से छह लोगों ने दुष्कर्म को अंजाम दिया था। दोषियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक दिया था। इसके बाद छात्रा की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में अदालत ने चार लोगों अक्षय, विनय, पवन और मुकेश को दोषी ठहराया था, जबकि मामले में एक अन्य आरोपी ने दोषी साबित होने से पहले ही खुदकुशी कर ली थी। छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह में सजा पूरी करने पर छोड़ दिया गया।

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English summary
There will Be no Hanging in The Nirbhaya Case on February 1,
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