Gujarat Election 2022 : कांग्रेस की पिच पर PM मोदी ने की भाजपा के लिए बैटिंग
Gujarat Election 2022, वलसाड जिले के नानापोंढा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभी थी। उन्होंने कहा, “मेरी एबीसीडी में ए फॉर आदिवासी है। मुझे खुशी है कि चुनाव की घोषणा के बाद मेरा पहला कार्यक्रम ही आदिवासी भाई- बहनों के बीच रखा गया है। भाजपा इस चुनाव (2022) की शुरुआत ही आदिवासी भाई-बहनों के आशीर्वाद से कर रही है।” नरेन्द्र मोदी ने आखिर वलसाड से ही अपने चुनावी अभियान की शुरुआत क्यों की ? क्या यह चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है ?

कांग्रेस कीं पिच पर PM मोदी की बैटिंग
दरअसल मोदी 2022 के चुनाव में हर कमजोर कड़ी को दुरुस्त कर लेना चाहते हैं। वलसाड गुजरात के दक्षिण पूर्वी भाग में अवस्थित है। यह एक आदिवासी बहुल जिला है। इसकी पूर्वी सीमा महाराष्ट्र के नासिक जिले और दक्षिण पश्चिम में पालघर जिले से मिलती है। पश्चिमी सीमा दमन और दीव से मिलती है। वलसाड की उत्तरी पश्चिमी सीमा को अरब सागर छूता है। गुजरात की 182 में से 27 सीटें जनजाति समुदाय के लिए रिजर्व है। जनजाति बहुल अधिकतर जिले दक्षिण गुजरात में हैं। वलसाड, नवसारी, डांग और भरूच जिला आदिवासी बहुल हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी समुदाय की इन 27 सीटों में से 15 पर कांग्रेस को जीत मिली थी। भाजपा 9 पर ही जीत पायी थी। 2012 के चुनाव में भी कांग्रेस के खाते में 15 सीटें आयीं थीं। जबकि भाजपा को 10 मिली थीं। यानी आदिवासी समुदाय में कांग्रेस की पकड़ ज्यादा मजबूत रही है। इसलिए नरेन्द्र मोदी ने 2022 में कांग्रेस के किले में सेंध लगाने के लिए सबसे पहले वलसाड को चुना। उन्होंने कांग्रेस की पिच पर भाजपा की पारी को जमाने के लिए बैटिंग की।

27 सीटों पर प्रदर्शन सुधारने की कोशिश
गुजरात में आदिवासी वोटरों की तादात करीब 15 फीसदी है। वोट बैंक के नजरिये से यह एक बड़ा समूह है। गुजरात के 14 जिलों में इनकी आबादी है। 182 में करीब 48 विधानसभा सीटों पर आदिवासी समुदाय निर्णायक स्थिति में है। भाजपा कांग्रेस के इस वोट बैंक को तोड़ने के लिए पिछले कई साल से कोशिश कर रही है। 2017 में एसटी रिजर्व सीट पर जीते कांग्रेस के 15 विधायकों में से दो को उसने तोड़ लिया। डांग और कपराडा सीट से जीते विधायक भाजपा में आ गये। इस बीच आदिवासी बहुल मोरवा हदफ सीट पर उपचुनाव हुआ जिसमें भाजपा को जीत मिली। इस तरह 2022 के आते-आते भाजपा के 12 आदिवासी विधायक हो गये। अब कांग्रेस की सदस्य संख्या 13 पर सिमट गयी है। दो विधायक भारतीय ट्राइबल पार्टी के हैं।

वन बंधु कल्याण योजना पार्ट टू की अग्निपरीक्षा
जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने 2007 में वन बंधु कल्याण योजना शुरू की थी। आदिवासी समुदाय को लुभाने की यह कोशिश बहुत सफल नहीं रही। 14 साल बाद 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने वन बंधु कल्याण योजना को नये रूप में लॉन्च किया। आदिवासी सीटों पर प्रदर्शन सुधारने के लिए एक सघन अभियान चलाया गया। 2007 से 2021 तक गुजरात सरकार इस योजना पर 96 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। आदिवासी बहुल इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और अन्य संरचना के विकास के लिए जो काम किये गये हैं, अब जनता उस पर फैसला देने वाली है। चूंकि नरेन्द्र मोदी भाजपा के सबसे बड़े चुनावी चेहरा हैं इसलिए वे आदिवासी समुदाय को साधने के लिए ए फॉर आदिवासी की बात कह रहे हैं।
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भाजपा ने 150 से 160 सीट जीतने का लक्ष्य बनाया
भाजपा ने 2022 के लिए कितनी सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, इसको लेकर एकरूपता नहीं। जब अक्टूबर में गुजरात गौरव यात्रा निकली थी तब 144 सीटों का लक्ष्य रखा गया था। अब 150 से 160 के बीच सीट जीतने का लक्ष्य बताया जा रहा है। हालांकि ये लक्ष्य आसमान से तारे तोड़ने की तरह हैं। भाजपा आजतक गुजरात में 127 से अधिक सीटें नहीं जीत सकी है। 127 सीट भी भाजपा ने तब जीती थी जब 2002 में दंगों के बाद चुनाव हुआ था। 2007 में मोदी के मुख्यमंत्री रहते भाजपा 117 सीट ही जीत पायी थी। 2012 में 115 और 2017 में 99 सीट ही उसे मिली थी। 1995 के चुनाव में उसे 121 सीटें मिली थीं। इसलिए 2022 में 150 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य अतिशयोक्तिपूर्ण लग रहा है। हां, यह एक चुनावी रणनीति हो सकती है। गुजरात में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम पर दर्ज है। 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने 149 सीटों पर कब्जा जमाया था। 2017 के नतीजों से भाजपा को कई सबक मिले हैं। इसलिए अब वह अपने उन कमजोर पक्षों को मजबूत करना चाहती है जिसकी वजह से सीटों की संख्या कम हुई।












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