गुजरात विधानसभा चुनाव: हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल क्यों नहीं हुए ?
हार्दिक पटेल साफ साफ करते हैं कि कांग्रेस और बीजेपी मतलब चोर-चोर मौसेरे भाई लेकिन कांग्रेस चोर है तो बीजेपी महाचोर। इसलिए वो महाचोर के बजाए चोर का साथ दे रहे हैं। तो साफ है कि हार्दिक पटेल कांग्रेस का समर्थन तो कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस में शामिल नहीं होना चाहते। ये बात अलग है कि हार्दिक पटेल की राजनीति की शुरूआत मौजूदा गुजरात सरकार के विरोध से जन्मी है। आरक्षण के अलावा बेरोजगारी और शराबबंदी मुद्दे सीधे सीधे बीजेपी सरकार से जुड़े हैं। ऐसे में खुद हार्दिक पटेल भी जानते हैं कि उनके सामने कांग्रेस का समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं। लेकिन फिर वही सवाल उठता है कि हार्दिक कांग्रेस शामिल होने से परहेज क्यों कर रहे हैं तो उसके पीछे ठोस वजह है। गुजरात के पाटीदार समाज में ही नहीं बल्कि राज्य के युवाओं में एकजुट होने की जो अलख उन्होंने जगाई है, उसे वो किसी दल की छत्रछाया में नहीं ले जाना चाहते। वो दूरगामी सोच के साथ चल रहे हैं।

पाटीदार समाज का सहारा ही था
जब स्व.माधव सिंह सोलंकी ने खाम राजनीति का कार्ड खेला था तो उसमें पाटीदार समाज का साथ था और इस समाज की बदौलत ही वो मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठे। ये भी सच है कि पाटीदार समाज के गुस्से ने ही उन्हें गद्दी से उतार भी दिया। इसके बाद बीजेपी भी सत्ता में आई तो पाटीदार समाज के समर्थन से ही। 22 साल राज किया तो पाटीदार समाज का सहारा ही था।

हार्दिक जानते हैं ये बात
हार्दिक जानते हैं कि अब फिर पाटीदार समाज इकट्ठा हुआ है और समाज को वो नेतृत्व दे रहे हैं तो समाज गुजरात की राजनीति को नेतृत्व दे रहा है। सभी को मालूम है कि गुजरात चुनाव का पूरा फोकस पाटीदार समाज और उसके अगुआ हार्दिक पटेल पर हैं। हार्दिक जानते हैं कि यदि वो कांग्रेस में शामिल हो गए तो दो साल की कड़ी मेहनत से उनकी स्वतंत्र लीडर की जो इमेज बनी है, वो खत्म हो जाएगी।

पांच साल बाद क्या होगा, किसी को नहीं मालूम
समाज में भी कई धड़े होते हैं और समाज पहले अपनी बात करता है, बाद में राजनीतिक दल का। दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि हार्दिक की उम्र अभी 24 साल की हुई है और वो जानते हैं कि उनकी असली पारी इस चुनाव में नहीं बल्कि इसके पांच साल बाद आने चुनाव में होगी जब वो खुद चुनाव लड़ने में सक्षम होंगे। यदि समाज बदलाव चाहता है तो वो सत्ता की चाबी कांग्रेस को सौंप देगा लेकिन अगले पांच साल बाद क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।

जनीतिक रूप से परिपक्व नजर आ रहे हैं हार्दिक
24 साल की उम्र में ही हार्दिक पटेल राजनीतिक रूप से परिपक्व नजर आ रहे हैं इसीलिए वो राहुल गांधी के सामने यूं ही सरेंडर नजर नहीं करना चाहते । उन्हें अपनी ताकत का अंदाजा है और बीजेपी की घबराहट का भी। वो चाहते हैं कि कांग्रेस को समर्थन तो दें लेकिन उसमें पाटीदार समाज की अग्रणी भूमिका हो, उनके उम्मीदवारों को टिकट मिले और कम से कम गुजरात में वो राहुल की बराबरी में खड़े नजर आएं। चुनाव भले ही कांग्रेस लड़े लेकिन उसकी रणनीति में हार्दिक पटेल अपनी बड़ी भूमिका देखते हैं।

बीजेपी भी समझ रही है कि ये गठजोड़ भारी
यही वजह है कि राहुल और उनकी मुलाकात मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं। यही नहीं बीजेपी भी समझ रही है कि ये गठजोड़ भारी पड़ने वाला है इसीलिए उनकी मिलीभगत को लेकर हार्दिक पर निशाना साधे जा रहे हैं। कुल मिलाकर हार्दिक पटेल के लिए ये चुनाव प्री पोल है, इसकी अग्नि परीक्षा में गुजरने के बाद ही गुजरात की राजनीति में उनकी असल भूमिका सामने आएगी।

हार्दिक पटेल जान रहे हैं ये बात
हार्दिक पटेल खुद इसे जान रहे हैं, इसलिए वो अपना फोकस गुजरात और पाटीदार मुद्दों पर ही किए हैं ताकि राजनीति के इस टेड़े मेड़े रास्ते पर वो अपनी मंजिल पा सकें। वो ये भी जानते हैं कि अभी उन्हें लंबा सफर तय करना है इसलिए हर कदम फूंक फूंक कर रखना है।












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