स्वास्थ्य और जीवन बीमा से GST खत्म होने की क्यों बढ़ी उम्मीद? गडकरी के बाद बीजेपी के ये सहयोगी भी आगे आए
स्वास्थ्य और जीवन बीमा से वस्तु और सेवा कर (GST) हटाने की मांग अब और तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। क्योंकि, केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार की दक्षिण भारत के सबसे अहम सहयोगियों ने भी इसकी मांग शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी पहले ही इन सेवाओं से जीएसटी हटाने की वकालत कर चुके हैं।
केंद्र की एनडीए सरकार में बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी है। तेलगू देशम पार्टी और आंध्र प्रदेश में इसकी एक और सहयोगी जन सेना पार्टी ने भी स्वास्थ्य और जीवन बीमा के साथ-साथ हैंडलूम से भी जीएसटी खत्म करने की मांग शुरू कर दी है।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स कम हो- टीडीपी
बजट पर बहस के दौरान टीडीपी के सांसद लावु श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स कम हो और इंडेक्सेशन वापस लाया जाए। उन्होंने कहा, 'कई सारे सदस्यों ने लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 20% से 12% तक घटाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने इंडेक्सेशन की बात भी रखी है....इसको लेकर बाहर बहुत बातें हो रही हैं। इसलिए मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री इसपर ध्यान देंगी।'
उनका कहना है कि 'इंडेक्सेशन पर पुनर्विचार होना चाहिए, क्योंकि मध्यम वर्ग के लोग सोचते हैं कि रियल एस्टेट एक ऐसी जगह है, जहां वे सुरक्षित निवेश कर सकते हैं। हमें लगता है कि इसे संरक्षित किया जाना चाहिए।'
जीएसटी घटेगा तभी ज्यादा लोग स्वास्थ्य बीमा ले सकें-टीडीपी सांसद
उन्होंने स्वास्थ्य और जीवन बीमा से जीएसटी हटाने पर जोर देते हुए कहा, 'स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर जीएसटी 18% है। अगर 75% लोगों के पास जीवन बीमा है, उनमें से सिर्फ 25% के पास ही स्वास्थ्य या मेडिकल बीमा है। ज्यादा लोगों के पास स्वास्थ्य या चिकित्सा बीमा होना चाहिए और कम लोगों के पास जीवन बीमा होना चाहिए या कम से कम दोनों की संख्या बराबर रहनी चाहिए। लेकिन, यह एकतरफा हो गया है। यह तभी हो सकता है कि जीएसटी घटेगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग स्वास्थ्य बीमा ले सकें।'
जीएसटी हटाने के लिए गडकरी वित्त मंत्री को लिख चुके हैं चिट्ठी
वहीं जन सेना पार्टी के सांसद वल्लभनेनी बालाशोवरी ने भी स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी हटाने की मांग की है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री और दिग्गज बीजेपी नेता नितिन गडकरी भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को खत लिखकर स्वास्थ्य और जीवन बीमा के प्रीमियम पर लगने वाली 18% जीएसटी को वापस लेने की गुजारिश की है। गडकरी का कहना है कि इनके प्रीमियमों पर जीएसटी लगाना, 'अनिश्चित जीवन पर टैक्स लगाने जैसा है।'
विपक्ष भी 18% जीएसटी का कर रहा है विरोध
बता दें कि विपक्षी इंडिया ब्लॉक भी जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर लगाई गई 18% जीएसटी घटाने की मांग कर रहा है और इसको लेकर संसद के बाहर प्रदर्शन भी कर चुका है।
स्वास्थ्य और जीवन बीमा से GST खत्म होने की क्यों बढ़ी उम्मीद?
जिस तरह से विपक्ष से लेकर सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगी दल स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं, उससे आम उपभोक्ताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं और हो सकता कि आने वाले समय में उन्हें कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल जाए।












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