सरकारी पैनल ने Biotech की Covaxine वैक्सीन के इमरजेंसी ट्रायल की दी परमीशन
नई दिल्ली। Bharat Biotech की कोवैक्सीन (Covaxine) भारत की पहली COVID-19 की ऐसी वैक्सीन है जिसे देश की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान निकाय ICMR के सहयोग से स्वदेश में ही विकसित किया गया है। देश की कोरोना वायरस वैक्सरी को मंजूरी देने की सिफारिश करीने वाली टीम ने सरकारी पैनी सीडीएससीओ की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित इस वैक्सीन के आपातकाली उपयोक को मंजूरी दे दी है। एक्सपर्ट कमेटी ने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट की कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी उपयोग की सिफारिश की है।
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CDSCO ने सार्वजनिक हित में आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए अनुमति देने की अनुमति थोड़ी मात्रा में एहतियात के तौर पर इस्तेमाल करने को हरी झंडी दिखा दी है। क्लिनिकल ट्रायल मोड में, विशेष रूप से उत्परिवर्ती तनाव संक्रमण के संदर्भ में, भारत बायोटेक को और चरण आठवीं क्लिनिकल प्रोटोकॉल के कैडिला के संचालन के लिए दी है।
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को इमरजेंसी में कुछ नियमों और शर्तों के साथ कोवैक्सीन इस्तेमानक करने की परमीशन दी है। हैदराबाद के भारत बायोटेक को जनहित में बहुत सावधान के साथ क्लीनिकल ट्रायल मोड में ये ध्यान देने की आवश्यकता है म्युटेंट स्ट्रेन का संक्रमण है। इसके अलावा अहमदाबार की जायडलस कैडिला हेल्थ केय को फेस 3 ट्रायल के लिए अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों की कमेटी ने ये शिफारिश ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से की है। वहीं अब इस वैक्सीन को अंतिम मंजूरी के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की परमीशन का इंतजार है।
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने COVISHIELD के प्रोडक्शन के लिए एस्ट्रेजेनेका के साथ डील की है। बता इे SII दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी है. ब्रिटेन की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तथा एस्ट्रेजेनेका द्वारा निर्मित टीके को बुधवार को मंजूरी दी गई थी।












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