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पीएम मोदी की मुहिम का असर, राज्यपाल ने खुद उतार दी लाल बत्ती

आचार्य देवव्रत देश के ऐसे पहले राज्यपाल बन गए हैं जिन्होंने खुद अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी। वे अपनी गाड़ी पर खुद चढ़े और लाल बत्ती उतारी।

शिमला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल बत्ती हटाओ मुहिम का असर शिमला में राजभवन में देखा गया। यहां राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी अपने वाहन से लाल बत्ती हटाने का निर्णय लिया। अपने वाहन पर खुद राज्यपाल चढ़े व उन्होंने वाहन में लगी लाल बत्ती को हटा दिया।

पीएम मोदी के मुहिम का असर, राज्यपाल ने खुद उतार दी लाल बत्ती

लालबत्ती का वीआईपी कल्चर समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अग्रिम पहल की व उन्होंने अपने वाहन तथा काफिले के सभी वाहनों से लाल बत्ती हटवाने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमण्डल की बुधवार को आयोजित बैठक में एक मई से वाहनों से लाल बत्ती हटाने का फैसला लिया गया है।

पीएम मोदी के मुहिम का असर, राज्यपाल ने खुद उतार दी लाल बत्ती
इसी के साथ अपनी सादगी के लिये मशहूर आर्चाय देवव्रत देश के पहले राज्यपाल हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्दर मोदी के आह्वान पर सबसे पहले लाल बत्ती हटाई है। राज्यपाल से प्रदेश से बाहर अपने चार दिन के प्रवास पर हैं। राजभवन से रवाना होने से पूर्व उन्होंने वाहनों से लाल बत्ती हटाई। वह सरकारी हैलीकाप्टर से दिल्ली गए और दिल्ली पहुंचने पर भी उन्होंने वहां उपलब्ध सरकारी वाहनों से लाल बत्ती हटाई।

इस संबंध में राज्यपाल ने पीएम मोदी के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह मजबूत लोकतंत्र के लिए एक पहल है। इससे वीवीआईपी संस्कृति खत्म होगी। यह एक ऐतिहासिक निर्णय है, जिससे देश में 'वीआईपी संस्कृति' समाप्त की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र की दिशा में यह एक बेहतर कदम है। इससे समाज में समभाव भी आएगा और आपराधिक प्रवृति के लोग जो लाल बत्ती लगाकर समाज को नुकसान पहुंचाते हैं उसमें भी कमी आएगी।

इससे पहले प्रदेश के परिवहन मंत्री जीएस बाली ने भी वीआईपी कल्चर को खत्म करने की पहल करते हुए अपनी गाड़ी पर लगाई गई रेड लाइट को उतार दिया था। बाली ने कहा कि बदलते वक़्त के साथ इंसान को बदलना चाहिए।

हिमाचल प्रदेश में लाल बत्ती को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस हो या विपक्षी दल भाजपा के विधायकों का खासा मोह रहा है। पिछली बार भी जब कोर्ट के एक फैसले के तहत लाल बत्ती पर बैन लगाया था तो सभी विधायकों ने दलगत राजनिति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाई व अपने लिये लाल बत्ती की जगह संतरी रंग की बत्ती प्रावधान करवा लिया था। लेकिन अब मोदी के फैसले ने सभी को सांसत में डाल दिया है। दरअसल केन्द्र सरकार अब उस प्रावधान को ही खत्म करने जा रही है, जिसमें इसे लगाने का अधिकार दिया गया है।

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