लोकपाल की नियुक्ति करे सरकार, एक्ट में बिना संशोधन हो सकता है अप्वाइंटमेंट
लोकपाल बिल पर बिना संशोधन के ही काम किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र के पास इसका कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि इतने वक्त तक लोकपाल की नियुक्ति को सस्पेंशन में क्यों रखा गया है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लोकपाल की नियुक्ति प्रक्रिया शुरु करने को कहा है। लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लोकपाल बिल पर बिना संशोधन के ही काम किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र के पास इसका कोई जस्टिफिकेशन नहीं है कि इतने वक्त तक लोकपाल की नियुक्ति को सस्पेंशन में क्यों रखा गया है। कोर्ट ने सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया है जिसमे लीडर ऑफ अपोजिशन ना होने की बात कही गई है।

आपको बता दें कि देरी को लेकर 7 जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। इसमें कोर्ट से मांग की गई है कि वो सरकार को जल्द से जल्द लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दें।
इससे पहले 28 मार्च को करीब दो घंटे तक चली थी सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता कॉमन कॉज की तरफ से वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार जान-बूझकर कर लोकपाल की नियुक्ति में देरी कर रही है।वहीं केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 के अनुसार लोकपाल की नियुक्ति के लिए नेता विपक्ष का होना जरूरी है और अभी लोकसभा में कोई नेता विपक्ष ही नहीं है।
मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकार इस दिशा में काफी गंभीर है और सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति में जगह देने के लिए लोकपाल कानून में बदलाव करने की प्रक्रिया में जुटी है।
शांति भूषण ने सरकार पर देरी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी नीयत साफ नहीं है और वो नियुक्ति करना ही नहीं चाहती है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में लंबित रखा जाए ताकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर नजर रख सके। इस देश में कानून का राज खत्म हो गया है।
भूषण ने कोर्ट से कहा कि अन्ना आंदोलन के दबाव में बनाए गए लोकपाल कानून को राष्ट्रपति ने 16 जनवरी 2014 को मंजूरी दी थी, लेकिन केंद्र सरकार के साथ ही कई राजनीतिक दल भी नहीं चाहते कि लोकपाल जैसी स्वायत्त संस्था बने।
एक याचिकाकर्ता ने कहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष मान लिया जाए ताकि लोकपाल की नियुक्ति हो सकती है। लोकपाल एक ऐसा कानून है जो नागरिकों के हक को मजबूत करता है इसलिए लोकपाल की नियुक्ति जल्द से जल्द होनी चाहिए।
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा कि संसद के मौजूदा सत्र के दौरान लोकपाल की नियुक्ति संभव नहीं है क्योंकि ये बजट के लिए तय सत्र है। रोहतगी ने कहा कि केंद्र सरकार अगले सत्र में लोकपाल की नियुक्ति कर सकती है।
आपको बता दें कि लोकपाल का चयन करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, नेता विपक्ष और एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ यानी कुल पांच सदस्य होते हैं।{promotion-urls}
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