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Google Doodle: शहंशाह-ए-तरन्नुम मो.रफी का जन्मदिन आज, महान फनकार को गूगल का सलाम

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    नई दिल्ली। आज है आवाज की दुनिया के सरताज मोहम्मद रफी का जन्मदिन, संगीत के इस महान फनकार को गूगल ने भी सलाम किया है, उसने अपना डूडल इस ग्रेट सिंगर को समर्पित किया है। शहंशाह-ए-तरन्नुम कहलाने वाले रफी साहब आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। हिंदी सिनेमा में आज तक कोई भी ऐसा गायक नहीं जो रफी साहब से आगे हो। हर कोई रफी साहब जैसा ही बनना चाहता है। आज भी पूरा देश उनके गाये गीतों पर झूम उठता है। संगीत के पुरोधा कहते हैं.. बॉलीवुड में कभी के. एल. सहगल, पंकज मलिक, के.सी. डे समेत जैसे गायकों के पास शास्त्रीय गायन की विरासत थी, संगीत की समझ थी लेकिन नहीं थी तो वो आवाज, जो दिल को छू ले और  कानों में  गूंजे, उसी कमी को रफी ने पूरा किया था।

    सन 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा'

    सन 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा'

    सन 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' से उन्होंने अपनी स्वतंत्र पहचान बनायी । 1965 में पद्दमश्री से नावाजे जा चुके रफी साहब को 6 बार फिल्मफेयर अवार्ड मिल चुका है। संगीत के जानकार बताते हैं आवाज की वह विविधता ही एक पाश्र्वगायक को परिपूर्ण बनाती है और वो आवाज थी रफी के पास।

    कुल 149 गीत गाए

    कुल 149 गीत गाए

    सन 1952 में आई फिल्म 'बैजू बावरा' से उन्होंने अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित की। इस फिल्म के बाद रफी नौशाद के पसंदीदा गायक बन गए। उन्होंने नौशाद के लिए कुल 149 गीत गाए जिनमें से 81 एकल थे।

    महान फनकार

    महान फनकार

    इनमें श्याम सुंदर, हुसनलाल भगतराम, फिरोज निजामी, रोशन लाल नागर, सी. रामचंद रवि, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, ओ.पी. नैय्यर, शंकर जयकिशन, सचिन देव बर्मन, कल्याण जी आनंद जी आदि शामिल थे।

    बेहतरीन नगमें

    बेहतरीन नगमें

    बाबुल की दुआएं लेती जा (फ़िल्म - नीलकमल), दिल के झरोखे में (फ़िल्म - ब्रह्मचारी), खिलौना जानकर तुम तो, मेरा दिल तोड़ जाते हो(फ़िल्म -खिलौना ), हमको तो जान से प्यारी है (फ़िल्म - नैना), परदा है परदा (फ़िल्म - अमर अकबर एंथनी), क्या हुआ तेरा वादा (फ़िल्म - हम किसी से कम नहीं ), आदमी मुसाफ़िर है (फ़िल्म - अपनापन), चलो रे डोली उठाओ कहार (फ़िल्म - जानी दुश्मन), मेरे दोस्त किस्सा ये (फिल्म - दोस्ताना), दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-ज़िगर(फिल्म - कर्ज), मैने पूछा चांद से (फ़िल्म - अब्दुल्ला).. आज भी जब बजते हैं तो लोग उनकी आवाज में खो जाते हैं।

    31 जुलाई 1980

    31 जुलाई 1980

    31 जुलाई 1980 को आवाज के महान जादूगर मोहम्मद रफ़ी को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए. लेकिन वह आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में पहले की तरह ही जीवित हैं। संगीत के इस उपासक को हमारा भी सलाम।

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    English summary
    On Padma Shri Mohammed Rafi's 93rd birthday, Google honours the legendary singer with a Doodle. Born on 24th December, 1924 in Kotla Sultan Singh, a village near present-day Majitha in Amritsar district of Punjab, Mohammed Rafi went on to win a million hearts globally.

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