तेलंगाना पर आंध्र के नेताओं से मंत्री समूह की मुलाकात

Telangana
नई दिल्ली/हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के विभाजन पर गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने राज्य के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार से मुलाकात शुरू कर दी।

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सबसे पहले जीओएम के सामने अपना पक्ष रखा। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष जी.किशन रेड्डी और नेता के.हरिबाबू ने अपनी बात रखी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव के.नारायण और जॉली विल्सन ने भी जीओएम से मुलाकात की।

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश, पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की बातें सुनीं। सभी दलों को बातचीत के लिए 20 मिनट का समय दिया गया। मंत्रियों ने कुछ विषय पर स्पष्टीकरण भी मांगा।

जीओएम शाम को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और कांग्रेस नेताओं से बातचीत करेगी। पांच पार्टियों ने जीओएम को अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। मंत्रियों के इस समूह ने तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को बुधवार को बातचीत के लिए बुलाया है। तीनों पार्टियों ने जीओएम को अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है।

हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने संवाददाताओं को बताया कि उनकी पार्टी को हैदराबाद को दोनों राज्यों की राजधानी या फिर केंद्र शासित प्रदेश बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जीओएम से कहा कि हैदराबाद में कानून-व्यवस्था या अन्य मसले को केंद्र सरकार द्वारा देखा जाना असंवैधानिक है।

उन्होंने सीमांध्र (तटीय आंध्र प्रदेश व रायलसीमा) के लिए एक निश्चित समय तक राजधानी बना लिए जाने तक हैदराबाद को अंतरिम राजधानी बनाए जाने की मांग की।

ओवैसी ने जीओएम को अतिरिक्त ज्ञापन सौंपते हुए हैदराबाद में सीमांध्र के लोगों के खतरे का सामना करने की बात को बकवास बताया। भाजपा के नेता किशन रेड्डी ने कहा कि वह तेलंगाना में 10 जिलों के शामिल किए जाने और हैदराबाद को राजधानी बनाए जाने के पक्ष में हैं। पार्टी के सीमांध्र नेता हरिबाबू भी उनके साथ मौजूद थे। भाजपा चाहती है कि केंद्र सरकार सीमांध्र के लोगों के डर को कम करे।

किशन रेड्डी यह भी जानना चाहते थे कि कांग्रेस और केंद्र सरकार के पक्ष को जाने बिना यह अन्य पार्टियों की राय क्यों ले रही है। तेलंगाना का समर्थन कर रही भाकपा ने सीमांध्र के लिए राजधानी का गठन होने तक हैदराबाद में कानून-व्यवस्था के लिए अलग प्रक्रिया बनाने की मांग की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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