लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए घाटी के युवा हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो रहे
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में इन दिनों युवाओं के बीच हिबजुल मुजाहिद्दीन में शामिल होने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों सेना ने जहां कमांडर सबजार भट को मार गिराया तो इसके एक और आतंकी दानिश अहमद ने सरेंडर कर दिया। लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि युवा दरअसल कश्मीर घाटी में आजादी लड़ाई लड़ने के लिए संगठन का हिस्सा नहीं बन रहे हैं बल्कि लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए आतंकी संगठन का हिस्सा बन रहे हैं।

सबजार के जनाजे में दिखा था दानिश
पिछले दिनों दानिश अहमद ने सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर किया था। दानिश, सबजार भट के जनाजे में शामिल भीड़ में नजर आया था। दानिश अहमद के सरेंडर को जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। दानिश ने अपने कुबूलनाम में कहा कि घाटी में लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए कई लड़कों ने बंदूकें उठाई हैं।

लड़कियों के हीरो आतंकी
उसका कहना था कि कश्मीर की कई लड़कियां ऐसे लड़कों को अपने हीरों की तरह समझती हैं। हाथ में अगर कोई लड़का बंदूक पकड़े होता है तो लड़का स्ट्रॉन्ग और ताकतवर लगने लगता है और यही बात लड़कियों को भा जाती है। रियाज नाइकू, जाकिर मूसा और लश्कर-ए-तैयबा के अबु दुजाना की कई गर्लफ्रेंड्स हैं।

लड़कियों के सामने बनते हैं रॉबिन हुड
हिजबुल, साउथ कश्मीर में हावी है लेकिन नॉर्थ कश्मीर में उसकी पकड़ कमजोर है। लेकिन जल्द ही दानिश का संगठन मोह भंग हो गया और कई और लड़के सरेंडर करना चाहते हैं। इन लड़कों को हिजबुल ने जान से मारने की धमकी दी है और इस डर से ही वह कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। दानिश के मुताबिक ये लड़के लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए उनके सामने खुद को रॉबिन हुड की तरह पेश करते हैं।

वर्ष 2016 में गिरफ्तार हुआ था दानिश
दानिश पहले वर्ष 2016 में पत्थरबाजी करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद उसने सबजार भट के नेतृत्व वाले हिजबुल मुजाहिद्दीन को ज्वॉइन कर लिया। दानिश को सुरक्षाबलों और पुलिस ने सबजार भट के जनाजे में देखा था और फिर उसे किसी तरह से सरेंडर के लिए राजी किया गया।

आतंकियों के साथ संपर्क में था दानिश
दानिश के सरेंडर करने की घटना यह बताने के लिए काफी है कि घाटी के युवाओं का कैसे संगठन के लिए मोहभंग हो रहा है। दानिश साउथ कश्मीर में आतंकियों के संपर्क में था और इन आतंकियों ने ही उसे हिजबुल में आने के लिए उकसाया था। दानिश ने बताया है कि उस पर नॉर्थ कश्मीर के युवाओं की संगठन में भर्ती करने की जिम्मेदारी थी।

लूटी गई रकम से खरीदे जाते महंगे कपड़े
उसने आगे बताया कि जो भी रकम आतंकी लूटते हैं,उस पूरी रकम का प्रयोग आतंकी संगठन की फंडिंग के लिए नहीं होता है। दानिश ने बताया है कि बैंक लूट या फिर उगाही के जरिए जो भी रकम मिलती है उसे कभी-कभी कोई फैंसी गैजेट खरीद लिया जाता है या फिर महंगे कपड़े आ जाते हैं।












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