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क्या कभी झारखंड में भी थे डायनासोर?

By रवि प्रकाश - राजमहल (झारखंड) से, बीबीसी

मौसम ख़ुशनुमा है. तापमान है करीब 22 डिग्री सेल्सियस. कुछ लोग मुरली पहाड़ की मृत चट्टानों में 'ज़िंदगी' के अवशेष तलाश रहे हैं.

यहां की चट्टानों पर जुरासिक काल के लीफ़ इंप्रेशन यानी पत्तों की छाप मिली हैं. जुरासिक काल वो दौर था जब धरती पर डायनासोर के पाए जाने का अनुमान किया जाता है.

वैज्ञानिक अब शोध में जुटे हैं जिससे ये जानकारी हो सके कि क्या यहां जन्तुओं का भी बसेरा था.

राजमहल की पहाड़ी
Ravi Prakash
राजमहल की पहाड़ी

भू-विज्ञानी रंजीत कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया, "जियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम को कटघर गांव में अंडों के जीवाश्म मिले हैं. ये रेप्टाइल्स के अंडों की तरह दिखते हैं, छोटे आकार के हैं. सारे डायनासोर विशालकाय नहीं होते थे. कुछ का क़द मुर्गियों जैसा भी था."

वो शख़्स जो डायनासोर बेचता था

रंजीत सिंह का कहना है कि यहां मिले पेड़ों के जीवाश्म मेसोज्याइक काल के हैं - ये वही काल है जब डायनासोर के धरती पर पाए जाने का अनुमान किया जाता है.

लीफ़ इंप्रेशन
Ravi Praksh
लीफ़ इंप्रेशन

वैज्ञानिक कहते हैं कि इन पेड़ों के फलने-फूलने के लिए शुद्ध पानी के बहाव की ज़रूरत थी. डायनासोर भी ऐसे ही वातावरण में रहने के आदी थे.

राजमहल की पहाड़ियों में डायनासोरों के रहे होने की संभावनाओं को इन समानताओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

राजमहल के इलाक़े में पटिलोफाइलम, थिनफेल्डिया, ब्राकिफाइलम और टेनियोप्टेरिस प्रजाति के पेड़ों के जीवाश्म मिले हैं. संभव है कि इन पेड़ों की पत्तियां और टहनियां शाकाहारी डायनासोर का भोजन रही हों.

देखने में कैसे रहे होंगे असली डायनासोर?

राजमहल की इन्हीं पहाड़ियों में पुरावनस्पति वैज्ञानिक बीरबल साहनी ने पेंटोजाइली प्रजाति के जीवाश्म की खोज की थी.

तब ये बात पहली बार सामने आई थी कि यहां जुरासिक, ट्राईआसिक और लोअर क्रिटेसियस काल के पेड़ों के जीवाश्म बहुतायत में हैं.

बीरबल साहनी पहली बार 1946 में राजमहल आए थे. ये वो दौर था जब राजमहल पैसेंजर ट्रेनें नहीं आती थीं और साहनी को मालगाड़ी पर सवार होकर यहां आना पड़ता था.

झारखंड
Ravi Prakash
झारखंड

तबसे झारखंड के साहिबगंज और पाकुड़ में देशी-विदेशी वैज्ञानिक जीवाश्मों की खोज में लगे हुए हैं.

हाल ही में पाकुड़ के सोनाजोड़ी में पेड़ों के जीवाश्म पाए गए हैं. केकेएम कालेज पाकुड़ में वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रसन्नजीत मुखर्जी के मुताबिक़ ये जीवाश्म 65 से 150 लाख साल पुराने हो सकते हैं.

चार पंखों वाले डायनासोर भी होते थे

झारखंड सरकार ने ऐलान किया है कि वो साहिबगंज के मंडरो में जीवाश्म पार्क बनाने जा रही है जिसके लिए बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट, लखनऊ, के साथ एक क़रार किया गया है.

मुख्यमंत्री रघुवर दास का कहना है कि देश के पहले जीवाश्म पार्क में राजमहल इलाक़े में पाए गए जीवाश्मों को संरक्षित किया जाएगा.

राजमहल की पहाड़ी
Ravi Prakash
राजमहल की पहाड़ी

इस बीच जीएसआइ की तरफ़ से इस इलाक़े को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के लिए झारखंड सरकार को एक ख़त मिला है. संभवाना है कि आने-वाले दिनों में इस इलाक़े को संरक्षित घोषित कर दिया जाए.

BBC Hindi
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English summary
Geologist trying to find out remains of dinosaur in jharkhand.
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