Geminid Meteor Shower 2020: आज रात धरती पर होगी उल्का पिंडों की बारिश, सर्दी होगी चरम पर, जानिए जरूरी बातें

नई दिल्‍ली। कोरोना महामारी से आम जीवन भले ही अस्‍त व्‍यस्‍त हुआ हो लेकर पर्यावरण और नभमंडल पर इसका पॉजिटिव इफेक्‍ट पड़ा है। पहले की अपेक्षा हवा शुद्ध हुई है। नदियों में पानी साफ हैं। प्रदूषण की मात्रा कम होने के चलते आकाश में होने वाली हर छोटी बड़ी घटनाएं आसानी से नोटिस की जा सकती है। इसका ताजा उदाहरण आज यानी की 13 और 14 दिसंबर की रात देखने को मिलेगा। जी हां आज रात और सोमवार तड़के उल्‍का पिंडों की बारिश होगी और इसके बौछार से आकाश जगमगा उठेगा।

देर रात चरम पर होगी बौछार

देर रात चरम पर होगी बौछार

एमपी बिड़ला तारामंडल के निदेशक देवीप्रसाद दुआरी ने शनिवार को एक बयान में कहा कि ‘जैमिनिड' के नाम से जानी जाने वाली उल्का पिंडों की यह बौछार 13 दिसंबर की रात को चरम पर होगी। यह वर्ष की सबसे बड़ी उल्का पिंड बौछार होगी। उन्होंने कहा कि यदि आसमान में परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो जेमिनिड उल्का पिंड बौछार को भारत के हर हिस्से से देखा जा सकेगा।
इस दौरान सर्दी भी अपने चरम पर होगी।

देखने के लिए रात 3 बजे का करना होगा इंतजार

देखने के लिए रात 3 बजे का करना होगा इंतजार

अगर आप भारत में रहते हैं और उल्‍का पिंड की बारिश देखना चाहते हैं आपको रात 3 बजे का इंतजार करना होगा। जानकारों की मानें तो आज भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित जगहों पर उल्कापिंड की बारिश देख सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको धैर्य रखने की जरूरत है, क्योंकि तेज रोशनी में उल्का पिंड की बारिश नहीं दिखाई देगी।

प्रति घंटे 150 उल्का पिंडों की बौछार देखी जा सकती है

प्रति घंटे 150 उल्का पिंडों की बौछार देखी जा सकती है

जानकारों के मुताबिक बौछार अकसर उस समय होती है, जब पृथ्वी विभिन्न उल्का तारों के सूरज के निकट जाने के बाद छोड़ी गई धूल के बचे मलबे से गुजरती है। इनमें से जेमिनिड उल्का पिंड बौछार सबसे शानदार उल्का पिंड बौछारों में से एक होती है। ये बौछार हर साल दिसंबर के दूसरे सप्ताह के आस-पास दिखाई देती है। दुआरी ने बताया कि इस साल पूर्वानुमान है कि आसमान साफ होने के कारण प्रति घंटे 150 उल्का पिंडों की बौछार दिख सकती है।

क्‍या होता है उल्‍का पिंड और क्‍यों चमकती है

क्‍या होता है उल्‍का पिंड और क्‍यों चमकती है

उल्का पिंड चमकदार रोशनी की जगमगाती धारियां होती हैं, जिन्हें अक्सर रात में आसमान में देखा जा सकता है। इन्हें ‘शूटिंग स्टार' भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि वास्तव में, जब धूल के कण जितनी छोटी एक चट्टानी वस्तु बेहद तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो घर्षण के कारण प्रकाश की खूबसूरत धारी बनती है।

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