न्याय में देरी भी एक तरह का अन्याय, कोर्ट दे ध्यान- राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय मिलने में देर होना भी एक तरह का अन्याय है। इस अन्याय से बचने के लिए तारीख पर तारीख लगाने की प्रवृत्ति को रोकना होगा

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे और यहां उन्होंने न्यायग्राम टाउनशिप की आधारशिला रखी, रिमोट से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसका शिलान्यास किया। देवघाट झलवा में 35 एकड़ में न्याय ग्राम टाउनशिप बनेगी। टाउनशिप में आडिटोरियम, न्यायिक एकेडमी, प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केन्द्र, पुस्तकालय के साथ जजों के लिए आवासीय भवन, कर्मचारियों के लिए भवन एवं निदेशक आवास का निर्माण होगा। इसके लिए यूपी सरकार ने 39510.56 लाख रूपये की स्वीकृति दी है, न्याय ग्राम बनने से हाईकोर्ट के विस्तार में मिलेगी मदद। कार्यक्रम में राज्यपाल रामनाईक, सीएम योगी आदित्यनाथ, सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी मौजूद थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 'न्याय ग्राम' की आधारशिला रखने के बाद बतौर मुख्य अतिथि रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायालयों को मुकदमों की सुनवाई टालने से बचना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि मुकदमों का अडजर्नमेंट तभी होना चाहिए, जब कोर्ट के पास कोई अन्य विकल्प ना हो।

न्याय मिलने में देर होना भी एक तरह का अन्याय है

न्याय मिलने में देर होना भी एक तरह का अन्याय है

राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय मिलने में देर होना भी एक तरह का अन्याय है। इस अन्याय से बचने के लिए तारीख पर तारीख लगाने की प्रवृत्ति को रोकना होगा। राष्ट्रपति कहा कि हमें ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे सभी को समय से न्याय मिले, न्याय व्यवस्था कम खर्चीली हो और सामान्य आदमी की भाषा में में निर्णय देने की व्यवस्था हो। राष्ट्रपति ने न्यायपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष रखने की वकालत की।

स्थानीय भाषा में हो कोर्ट का काम

स्थानीय भाषा में हो कोर्ट का काम

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अदालतों को मुअक्किलों को जागरूक करने के लिए स्थानीय भाषा में कोर्ट में सुनवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अदालतों में होने वाले फैसलों की कॉपी स्थानीय भाषा में दी जाए तो इससे न्यायिक प्रक्रिया को समझने में भी मदद मिलेगी। राष्ट्रपति ने न्यायपालिका को सुझाव देते हुए कहा कि यदि स्थानीय भाषा में बहस करने का चलन जोर पकड़े तो सामान्य नागरिक भी अपने मामले की प्रगति को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। साथ ही निर्णयों और आदेशों की सत्यप्रतिलिपि का स्थानीय भाषा में अनुवाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।

देश के न्यायालयों नें 3 करोड़ मामले लंबित

देश के न्यायालयों नें 3 करोड़ मामले लंबित

राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश के न्यायालयों में लगभग तीन करोड़ मामले लंबित हैं। इनमें से लगभग 40 लाख मामले अकेले उच्च न्यायालयों में चल रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी निचली अदालतों में पेंडिंग लगभग साठ लाख मुकदमों को अगले कुछ वर्षों में शून्य के स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा है।

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