G-20 शिखर सम्मेलन के हाई-प्रोफाइल डिनर में नहीं शामिल होंगे पूर्व पीएम देवगौड़ा, राष्ट्रपति को बताई वजह
G20 Summit: देश की राजधानी दिल्ली में जी-20 का आयोजन हो रहा है। जी-20 में अमेरिका के राष्ष्ट्रपति बाइडेन समेत दुनिया भर के देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत के मेहमान बन कर आ रहे हैं। इस खास मौके पर 9 सितंबर को हाइप्रोफाइल रात्रिभोज का आयोजन किया गया है। जिसमें देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को भी आमंत्रित किया गया है लेकिन वो इस हाई-प्रोफाइल डिनर में शामिल नहीं हो पाएंगे।

देवगौड़ा ने खुद शुक्रवार को कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित जी20 रात्रिभोज में शामिल नहीं होंगे इसके साथ ही उन्होंने कहा मैं जी-20 शिखर सम्मेलन की शानदार सफलता की कामना करता हूं।
देवगौड़ा ने लिखा ये मैसेज
"जनता दल (सेक्युलर) के अध्यक्ष और पूर्व पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा "मैं माननीय द्वारा आयोजित जी20 रात्रिभोज में शामिल नहीं होऊंगा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मुजी की मेजबानी में 09 सितम्बर 2023 को आयोजित रात्रि भोज में स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हो पाऊंगा। इसके बारे में मैंने पहले ही सरकार को बता दिया है। मैं जी20 शिखर सम्मेलन की शानदार सफलता की कामना करता हूं।"
पूवी पीएम मनमोहन भी किए गए है आमंत्रित
एनएनआई न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट केे अनुसार जी-20 सम्मेलन के रात्रिभोज में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी आमंत्रित किया गया है। मीडिया को दिए इंटरव्यू में मनमोहन सिंंह ने कहा था कि "जी20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता देखकर खुशी हुई जब विदेश नीति आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।"
मनमोहन ने पीएम मोदी की तारीफ
पूर्व पीएम मनमोहन सिंंह ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि "रूस-यूक्रेन पर कड़ी कूटनीति को संभालने समय भारत के संप्रभु और आर्थिक हित को पहले रखा ये सराहनीय था।। उन्होंने कहा जब दो या दो से अधिक शक्तियां संघर्ष में फंस जाती हैं तो अन्य राष्ट्र पक्ष चुनने के लिए भारी दबाव में आ जाते हैं।"
जी-20 रात्रि भोज के आमंत्रण पर जमकर हुई राजनीति
भारत की अध्यक्षता में जी20 शिखर सम्मेलन में सहभागिता करने के लिए दुनिया भर के दिग्गज देश की राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। याद रहे जी20 रात्रिभोज के लिए राज्य द्वारा जारी निमंत्रण कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर छाया हुआ था। जिस पर बड़ा राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था क्योंकि इसे सामान्य 'भारत के राष्ट्रपति' के बजाय 'भारत के राष्ट्रपति' के नाम से भेजा गया था। जिसके बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि इंडिया का नाम सरकार भारत करने पर विचार कर रही है।












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