अयोध्या पर फैसला सुनाकर इतिहास रचने वाले पूर्व CJI रंजन गोगोई ने यहां भी पेश की मिसाल
नई दिल्ली- पिछले 17 नवंबर को रिटायर होने के तीन दिनों के भीतर लुटियंस दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करने वाले पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने एक और मिसाल कायम की है, जो नेताओं और बड़े-बड़े अधिकारियों के लिए किसी नजीर से कम नहीं हैं। उन्होंने खुद को पूर्व जस्टिस की हैसियत से गुवाहाटी हाई कोर्ट से मिली खास सुविधाओं की पेशकश भी ठुकरा दी है। इसके तहत उनके लिए गाड़ी, अर्दली और निजी सचिव की व्यवस्था होनी थी, लेकिन जस्टिस गोगोई ने बेहद सादगी का परिचय देते हुए इन तमाम सुविधाओं को लेने से मना कर दिया है। इससे पहले उनकी कार्यकाल खत्म होने के तीन दिनों के भीतर ही सरकारी बंगला खाली करने के लिए खूब चर्चा हो चुकी है।
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स्पेशल ट्रीटमेंट को जस्टिस (रि) गोगोई ने कहा 'ना'
देश के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने गुवाहाटी हाई कोर्ट से उन्हें दी जाने वाली विशेष सुविधाओं की पेशकश को विनम्रता के साथ ठुकरा दिया है। जानकारी के मुताबिक रिटायर्ड चीफ जस्टिस गोगोई ने उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट को धन्यवाद दिया है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद किसी भी तरह की विशेष सुविधाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया है। बता दें कि इससे पहले जस्टिस गोगोई ने तब एक मिसाल कायम की थी, जब उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने के सिर्फ 3 दिनों के अंदर ही सरकारी बंगला खाली कर दिया था। जबकि, कुछ नेताओं और पूर्व मंत्रियों की तो स्थिति ऐसी रही है जिन्हें अदालत के आदेश से जबरन निकाल-बाहर करना पड़ा है।

किन सुविधाओं को लेने से गोगोई ने किया इनकार?
17 नवंबर को जब देश के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर होने वाले थे और उन्होंने फैसला किया था कि वह दिल्ली में नहीं, बल्कि अपने गृहनगर गुवाहाटी में रहेंगे, तब गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनके लिए एक खास प्रस्ताव पारित किया था। गुवाहाटी हाई कोर्ट की प्रोटोकॉल कमेटी ने 'बार एंड बेंच' की एक रिपोर्ट के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव में रिटायरमेंट के बाद जस्टिस गोगोई को एक पूर्णकालिक निजी सचिव (पीए), ड्राइवर समेत कार और दो चपरासी दिए जाने की बात थी, जिसे हाई कोर्ट ने मंजूरी दी थी।

रिटायरमेंट के बाद गुवाहाटी में रह रहे हैं गोगोई
रिटायरमेंट के बाद जस्टिस रंजन गोगोई गुवाहाटी के जिस आवास में रह रहे हैं, वह उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट की ओर से ही उपलब्ध कराया गया है। उनके लिए इस आवास को चुनने से पहले उनकी सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। यह आवास गुवाहाटी के गीतानगर इलाके में स्थित है। इससे पहले उन्होंने रिटायर होने के महज तीन दिनों के भीतर ही नई दिल्ली के लुटियंस जोन्स में मौजूद 5 कृष्ण मेनन मार्ग का सरकारी बंगला खाली कर दिया था। नियमों के तहत वे एक महीने तक उस बंगले में रह सकते थे। जस्टिस गोगोई से पहले पूर्व सीजेआई जेएस खेहर ने भी सेवा समाप्ति के एक हफ्ते बाद ही आधिकारिक बंगला छोड़ दिया था।

सुप्रीम कोर्ट से जाते-जाते दिया था अहम संदेश
जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन सुप्रीम कोर्ट के रूम नंबर एक में कुछ वक्त बिताया था, जहां उन्हें औपचारिक विदाई दी गई थी। इस दौरान उन्होंने एक विडियो मैसेज के जरिए उपस्थित लोगों को एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के कामकाज में गुंडागर्दी और धमकाने वाली हरकतों की वजह से इसका स्तर गिरा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत की गरिमा को हरहाल में बरकरार रहने की आवश्यकता है। इस संदेश में उन्होंने ये भी कहा कि, 'भले मैं शारीरिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट में मौजूद न रहूं, लेकिन मेरा एक हिस्सा हमेशा सुप्रीम कोर्ट में रहेगा।'

अयोध्या पर फैसला सुनाकर रच दिया इतिहास
देश में जब भी अयोध्या विवाद के निपटारे का जिक्र होगा देश के 46वें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का नाम हमेशा लिया जाएगा। उन्होंने न केवल उस पांच जजों की संवैधानिक खंडपीठ की अगुवाई की थी, जिसने अयोध्या विवाद को हमेशा-हमेशा के लिए सुलझा दिया, बल्कि जिस हौसले के साथ इतने जटिल और पुराने कानूनी मामले को 40 दिन तक लगातार सुनवाई करके उसे एक सुखद अंजाम तक पहुंचाया वह देश की अदालती प्रक्रिया के लिए एक मिसाल बन चुका है। इसके अलावा जस्टिस गोगोई को भारतीय न्याय व्यवस्था में जिन और बड़े फैसलों के लिए याद किया जाएगा, उनमें सीजेआई के दफ्तर को आरटीआई के दायरे में लाना, असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करना, राफेल विमान सौदा में सरकार को क्लीनचिट जैसे मामले शामिल हैं।
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