'1970 की नसबंदी जैसी है पीएम मोदी की नोटबंदी, जनता की प्रॉपर्टी पर बड़ा डाका'

संपादक स्टीव फोर्ब्स ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी सरकार का यह फैसला अनैतिक है और इससे देश की जनता को नुकसान होगा।

दिल्ली। नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने में महज चार दिन रह गए हैं और देश में ही नहीं, विदेशों से भी नरेंद्र मोदी सरकार और उसके इस फैसले की आलोचना के सुर सुनाई दे रहे हैं।

दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स के संपादक ने नोटबंदी की तुलना भारतीय इतिहास में कुख्यात 1970 की नसबंदी से करते हुए इसे अनैतिक कदम और जनता की संपत्ति की बड़ी चोरी बताया है।

नोटबंदी से होगा देश की जनता को बड़ा नुकसान

नोटबंदी से होगा देश की जनता को बड़ा नुकसान

फोर्ब्स मैगजीन के 24 जनवरी 2017 के अंक में चेयरमैन और संपादक स्टीव फोर्ब्स ने आर्टिकल लिखा है। यह ऑनलाइन उपलब्ध है। इसमें स्टीव फोर्ब्स ने नरेंद्र मोदी सरकार की नोटबंदी की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को अनैतिक और बहुत खराब कदम बताया है।

उन्होंने लिखा है कि देश की 86 प्रतिशत करेंसी को अचानक बंद करने से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने इसकी तुलना 1970 की नसबंदी से की।

स्टीव ने नोटबंदी के फैसले पर लिखा, 'देश की जनसंख्या कम करने के लिए 1970 में की गई जबर्दस्ती नसबंदी के बाद फिर से सरकार ने कोई ऐसा कदम उठाया है जो बहुत ही अनैतिक है।'

'क्या नोटबंदी के बाद आतंकी आतंक फैलाना छोड़ देंगे'

'क्या नोटबंदी के बाद आतंकी आतंक फैलाना छोड़ देंगे'

नोटबंदी के एलान के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे देश में काले धन और आतंकवाद के खिलाफ लिया गया फैसला बताया था। लेकिन इसकी आलोचना करते हुए स्टीव ने लिखा, 'सिर्फ करेंसी बदल देने से आतंकी बुरे काम करना नहीं छोड़ देंगे।'

स्टीव ने कहा कि अगर करेंसी को कैशलेस करना है तो मार्केट को फ्री करने पर इसके लिए एक अच्छा समय आएगा। और अगर टैक्स चोरी को रोकना है तो उसके लिए सबसे अच्छा उपाय फ्लैट टैक्स या लो रेट टैक्स सिस्टम है। अगर कानूनी तौर पर बिजनेस करने को आसान बनाया जाएगा तो लोग भी साथ देंगे।

'सरकार ने की है जनता की संपत्ति की बड़ी चोरी'

'सरकार ने की है जनता की संपत्ति की बड़ी चोरी'

स्टीव ने लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्यादा ट्रांजेक्शंस कैश में होते हैं। सरकार रिसोर्स पैदा नहीं करती, जनता करती है। भारत ने नोटबंदी का फैसला लेकर जनता की संपत्ति की बड़ी चोरी की है।

स्टीव ने लिखा कि एक चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार का यह शॉकिंग फैसला था जिससे जनता को भारी नुकसान उठाना होगा और ऐसा करके भारत ने दुनिया में एक खतरनाक उदाहरण सेट किया है।

स्टीव से पहले वाल स्ट्रीट जनरल ने भी 22 दिसंबर के इश्यू के एक आर्टिकल में कैशलेस इकनॉमी को जनता के लिए खतरनाक बताया है। इसमें लिखा है कि कैशलेस इकनॉमी में सरकार की ताकत और बढ़ जाती है और यह उसका गलत इस्तेमाल कर सकती है। आर्टिकल में बताया गया है कि कैशलेस सोसायटी, लोगों की आर्थिक स्वतंत्रता की विरोधी है।

प्रधानमंत्री और नोटबंदी की बढ़ी आलोचना

प्रधानमंत्री और नोटबंदी की बढ़ी आलोचना

भारत में नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने में अभी चार दिन बाकी हैं और लोगों की समस्याएं ज्यों की त्यों है। कैश की कमी से जूझ रही जनता बैंक और एटीएम के आगे अभी भी लंबी लाइनों में खड़ी नजर आती है।

एलान के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कैश की समस्या सिर्फ 50 दिनों तक रहेगी और जैस-जैसे ये 50वां दिन नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे नोटबंदी के फैसले और इसको ठीक से लागू करने में मिली असफलता पर नरेंद्र मोदी सरकार को बहुत कुछ सुनना पड़ रहा है।

विपक्षी नेता लगातार नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर एटैक कर रहे हैं। नोटबंदी पर गठित रिव्यू कमेटी के मुखिया और सरकार के सहयोगी चंद्रबाबू नायडू तक ने कह दिया कि समस्या का समाधान नहीं सूझ रहा। साथ ही, इस मसले पर आरबीआई और सरकार के बीच संबंधों में तनाव की खबरें भी आई हैं।

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