2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी किसके लिए बनेगी चुनौती? स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को किया है चैलेंज
अमेठी में 2024 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के मुकाबले में कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, ये तो अभी साफ नहीं है, लेकिन इस सीट को लेकर राजनीति अभी से गरम होने लगी है।
इसकी शुरुआत करीब दो महीने पहले ही कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष बनने की उत्साह में अजय राय के एक बयान से हुई थी। पहले उन्होंने दावा किया था कि राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में अमेठी से 'निश्चित' लड़ेंगे।

कांग्रेस अमेठी के लिए बना रही है नई रणनीति
लेकिन, कुछ घंटों बाद ही उन्हें अपना बयान सुधारना पड़ गया। अब उनका कहना था कि 'कांग्रेस के कार्यकर्ता और अमेठी के लोग मांग कर रहे हैं कि वो अपनी भूल सुधारना चाहते हैं और राहुल गांधी की बड़ी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं।' हालांकि, इसके बावजूद कांग्रेस अपने गांधी परिवार का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट को भाजपा से वापस छीनने की रणनीति पर काम करना जारी रखा है।
स्मृति ईरानी ने राहुल को अमेठी से चुनाव लड़ने की दी है चुनौती
अजय राय के बयानों के बाद बीजेपी ने इस सीट के लिए अपने तेवर और आक्रामक कर रखे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास योजनाओं की शुरुआत और सांसद खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अमेठी में थे। वहां उनके साथ केंद्रीय मंत्री और अमेठी से भाजपा की मौजूदा सांसद स्मृति ईरानी भी थीं।
इस दौरान ईरानी और सीएम योगी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को फिर से अमेठी से चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली। ईरानी ने कहा, 'उनमें यह कहने की हिम्मत नहीं है कि वह यहां से फिर चुनाव लड़ेंगे....।' उन्होंने कांग्रेस नेता पर यह कहकर भी तंज कसा कि अमेठी अब 'गायब' सांसद के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए जानी जाती है।
भाजपा अपनी पुरानी रणनीति पर ही कायम
भाजपा की रणनीति साफ लग रही है। वह इस सीट को गांधी परिवार की कथित विफलताओं और मौजूदा सांसद ईरानी के कार्यकाल की सफलताओं के दावों के आधार पर ही लड़ना चाहती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने तब के स्थानीय सांसद राहुल को 55,000 से ज्यादा वोटों से हरा दिया था।
कांग्रेस के लिए अमेठी सीट रही है 'परिवार की विरासत'
कांग्रेस के लिए यह सीट आज भी प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। क्योंकि, अमेठी से सोनिया गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी भी सांसद रह चुके हैं। लेकिन, पिछले चुनावों में ईरानी ने राहुल को हराकर इस सीट पर नया इतिहास रच दिया था। हालांकि, राहुल तब 45% मुस्लिम मतदाताओं वाली केरल की वायनाड सीट पर भी लड़े थे और अभी वहीं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
कांग्रेस अमेठी सीट को लेकर कर सकती है बड़ी घोषणा
हालांकि, योगी-ईरानी के चैलेंज को गांधी परिवार स्वीकारता है या नहीं यह तो अभी साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस की प्रदेश इकाई हर हाल में अपने गांधी परिवार के विरासत को वापस लेने के लिए पूर्ण संघर्ष करने के लिए तैयार है। इसके लिए पार्टी जमीनी स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिशें कर रही है।
माना जा रहा है कि 3 दिसंबर को पांच राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद कांग्रेस अमेठी सीट को लेकर कोई बड़ी घोषणा कर सकती है। लेकिन, यहां कांग्रेस जिसे भी उम्मीदवार बनाए, यहां के वोटरों के सामने पार्टी नए अवतार में सामने आएगी। जिस दल को कभी यहां ब्राह्मण, मुसलमान और दलितों की पार्टी समझा जाता है, उसके नेता अभी ओबीसी की राजनीति में सबको पीछे छोड़ने की कोशिशों में जुटे हैं।
ऐसे में मामला दिलचस्प हो सकता है कि कांग्रेस को स्मृति ईरानी से चुनौती मिलेगी या फिर खुद उन्हें ही नई राजनीति के चैलेंज का सामना करना होगा। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी इस सीट पर तब भी हारे थे, जब सपा-बसपा और रालोद गठबंधन ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिए थे।












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