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निर्भया केस: देश में पहली बार गुनहगारों को फांसी द‍िए जाने के बाद होगा पोस्‍टमार्टम, जानिए वजह

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बेंगलुरु। निर्भया के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी पर लटकाए जाने का पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा डेथ वारंट जारी किया जा चुका हैं। डेथ वारंट के बाद फांसी से घबराएं दो दोषी मुकेश सिंह और विनय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका डाली थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने आगामी 22 जनवरी की सुबह 7 बजे चारों को फांसी पर लटकाए जाने का आदेश दिया है। मालूम हो कि निर्भया के चारों दोषी अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय कुमार शर्मा और पवन कुमार गुप्ता की फांसी पर लटकाने की पूरी तैयारी तिहाड़ जेल में हो चुकी हैं। अब इस आदेश के बाद निर्भया के साथ दंरिदंगी करने वाले चारों हत्यारों को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा।

    Nirbhaya Case: फांसी के बाद चारों दोषियों के शवों को होगा Post-mortem | वनइंडिया हिंदी

    nirbhya

    पिछले सात साल से अपनी बेटी के हत्‍यारों को फांसी पर लटकने का इंतजार कर रही निर्भया की मां सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों दोषियों की क्यूरेटिव पेटिशन खारिज किए जाने के बाद राहत भरी सांस ली। बता दें निर्भया की मां ने पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर कर दोषियों के डेथ वारंट की मांग की थी, जिस पर कोर्ट ने निर्भया की मां के हक में फैसला सुनाया और 22 जनवरी फांसी की तारीख के तौर पर मुकर्रर की थी।

    तिहाड़ में दर्ज होगा ये नया इतिहास

    तिहाड़ में दर्ज होगा ये नया इतिहास

    बता दें निर्भया केस में इन चारों को एक साथ फांसी पर लटकाए जाने के बाद तिहाड़ जेल में यह नया इतिहास दर्ज होगा जब एक साथ चार लोगों को फांसी को दी गयी। इसके साथ ही निर्भया केस में यह भी इतिहास दर्ज होगा जब फांसी के बाद शवों का पोस्‍टमार्टम होगा। तिहाड़ जेल ही नहीं देश में यह पहला मौका है जब कि फांसी के बाद शवों का पोस्‍टमार्टम कराया जाएगा। शवों का पोस्‍टमार्टम करवाने का निर्णय इस केस की गंभीरता और जेल के नए नियमों के आधार पर लिया गया हैं। मालूम हो कि रविवार को चारों दोषियों को फांसी का डमी ट्रायल भी किया गया। वहीं, बताया जा रहा है कि चारों दोषियों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय कुमार शर्मा और पवन कुमार गुप्ता का जेल में व्यवहार असामान्य हो गया है, कई बार वे रोते भी देखे गए।

    ऐसे दी जाएगी फांसी

    ऐसे दी जाएगी फांसी

    फांसी की तारीख से एक दिन पहले जेल अधिकारी, डाक्टरों की टीम, एसडीमए फांसी घर का मुआयना करेंगे। डॉक्टरों की टीम जल्लाद को हिदायत देगी कि दोषियों की लंबाई के हिसाब से रस्सी की लंबाई रखे। फांसी के दौरान दोषी की गर्दन में झटका ना लगे, इसके लिए फंदा लगाने के बाद शरीर को कुंए में धीरे-धीरे छोड़ा जाएगा।

    इसलिए लिए होगा पोस्‍टमार्टम

    इसलिए लिए होगा पोस्‍टमार्टम

    बता दें तिहाड़ जेल में अंतिम फांसी अफजल गुरु को दी गई थी और उसका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। शव को जेल में ही दफनाया गया था। इससे पहले रंगा-बिल्ला, सतवंत सिंह सहित जितने भी दोषियों को फांसी दी गई है, उनके पोस्टमार्टम नहीं कराए गए थे। सबसे पहले तिहाड़ जेल में 1982 में बिल्ला और रंगा को फांसी पर लटकाया गया था। तिहाड़ जेल में यह पहला मौका होगा जब फांसी के बाद शवों का पोस्‍टमार्टम कराया जाएगा। जेल के नए नियमों के अनुसार शवों का पोस्‍टमार्टम करवाने का निर्णय लिया गया हैं।

    ये जल्‍लाद देगा फांसी

    ये जल्‍लाद देगा फांसी

    फांसी की पूरी प्रक्रिया में जल्लाद की भूमिका अहम होती है। जल्लाद फांसी से पहले सुनिश्चित करता है कि फांसी की पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द बिना किसी अवरोध के पूरा हो जाए। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाले पवन जल्लाद निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाएगा। तिहाड़ जेल प्रशासन ने यूपी के जेल राज्य मंत्री को एक पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के जेलों से 'जल्लादों' की जानकारी मांगी थी, साथ ही मेरठ जेल के जल्लाद पवन की सेवाएं लेने की अनुमति भी मांगी थी। वहीं, प्रदेश के जेल राज्यमंत्री ने इसके लिए अनुमति दे दी है। कुछ वर्ष पूर्व निठारी हत्याकांड के दोषी ठहराए सुरेंद्र कोली को फांसी दी जाने वाली थी, तब भी फांसी के लिए पवन जल्लाद को चुना गया था हालांकि बाद में वो फांसी टल गई। दिल्ली पुलिस की गुजारिश पर संभव है यूपी पुलिस 17 जनवरी तक जल्लाद पवन तिहाड़ जेल पहुंच जाए। इसके बाद फांसी की प्रक्रिया को तेजी से अमल में लाया जाएगा।

    फांसी के फंदे पर इसलिए लगाया जाता है मक्खन

    फांसी के फंदे पर इसलिए लगाया जाता है मक्खन

    फांसी देने के लिए विशेष रस्सी का इंतजाम किया जाता है। यह रस्सी सिर्फ बिहार की बक्सर जेल में बनती है। बताया जाता है कि पहले यह फिलीपींस की राजधानी मनीला से मंगाई जाती थी इसलिए उसका यह नाम पड़ा। यहां लंबे समय से फांसी के फंदे बनाए जाते रहे हैं। एक फंदा 7200 कच्चे धागों से बनता है। पांच-छह कैदी दो-तीन दिन में इसे तैयार करते हैं। बताया जा रहा है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने ऐसे 12 फंदे मंगाए हैं। इस प्रक्रिया में फंदे की रस्सी का काम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फांसी पर लटकाने से पहले जल्लाद रस्सी को मुलायम करने की कोशिश करता है ताकि फंदा कहीं अटक न जाए। जल्लाद अपने तरीके से फंदे में प्रयुक्त रस्सी को मुलायम बनाता है। कुछ जल्लाद रस्सी को मुलायम करने के लिए मक्खन या मोम का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ इसके लिए पके केले का। पके केले को छीलकर उसे मथा जाता है, फिर उसे रस्सी पर लगाया जाता है। अंतिम बार रस्सी को जेल अधिकारी के समक्ष काले रंग के बक्से में रखकर सील कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि यह गर्दन को छीले नहीं। फांसी की पूरी प्रक्रिया में जल्लाद की भूमिका अहम होती है। जल्लाद फांसी से पहले सुनिश्चित करता है कि फांसी की पूरी प्रक्रिया जल्द से जल्द बिना किसी अवरोध के पूरा हो जाए। इस प्रक्रिया में फंदे की रस्सी का काम अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फांसी पर लटकाने से पहले जल्लाद रस्सी को मुलायम करने की कोशिश करता है ताकि फंदा कहीं अटक न जाए। जल्लाद अपने तरीके से फंदे में प्रयुक्त रस्सी को मुलायम बनाता है। कुछ जल्लाद रस्सी को मुलायम करने के लिए मक्खन या मोम का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ इसके लिए पके केले का। पके केले को छीलकर उसे मथा जाता है, फिर उसे रस्सी पर लगाया जाता है। अंतिम बार रस्सी को जेल अधिकारी के समक्ष काले रंग के बक्से में रखकर सील कर दिया जाता है।

    7 साल पहले छह दंरिदों ने निर्भया के साथ की दंरिदगी

    7 साल पहले छह दंरिदों ने निर्भया के साथ की दंरिदगी

    गौरतलब है कि 16 दिसंबर, 2012 को वसंत विहार इलाके में चलती बस में कुल छह दरिदों (राम सिंह, नाबालिग किशोर, मुकेश सिंह, विनय कुमार शर्मा, पवन कुमार गुप्ता और अक्षय ठाकुर) ने निर्भया के साथ वहशियाना हरकत की थी, जिसके बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान निर्भया की मौत हो गई थी। इस दोषियों में राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी, जबकि नाबालिग जुवेनाइल कोर्ट में महज तीन साल अपनी सजा पूरी कर रिहा हो चुका है। उधर, निचली अदालत के बाद दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी फांसी की सजा पर मुहर चुका है। इस बीच दिल्ली की स्थानीय अदालत बचे चारों दोषियों अक्षय, मुकेश, विनय और पवन के खिलाफ फांसी देने के लिए डेथ वारंट भी जारी कर चुका है, जिसके तहत 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जानी है।

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    English summary
    For the First Time in the Country, Post Mortem will be Done After Hanging the Accused of Nirbhaya.
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