डोकलाम गतिरोध के बाद चीन ने फिर की गुस्ताखी, तिब्बत में किया मिलिट्री ड्रिल

बीजिंग। चीन की सेना ने तिब्बत के हिमालय क्षेत्र में मिलिट्री ड्रिल की है। डोकलाम गतिरोध खत्म होने के बाद यह पहला मौका है, जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने तिब्बत क्षेत्र में मिलिट्री ड्रील की है। चीन कम्युनिस्ट पार्टी के ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, मंगलवार चीन तिब्बत क्षेत्र में पहुंची थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 13 घंटो तक चीन की मिलिट्री ने एक्सरसाइज की। पिछले साल अगस्त में चीन और भारत की सेना भुटान के डोकलाम में 70 से ज्यादा दिनों तक आमने-सामने रही थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच गतिरोध काफी बढ़ गया था।

डोकलाम विवाद के बाद चीन ने किया तिब्बत में मिलिट्री ड्रिल

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने नए दौर में वर्ल्ड क्लास मिलिट्री को खड़ी करने की योजना के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्थानीय कंपनियों और सरकार ने आपसी सहयोग से मिलिट्री ड्रिल किया था। इस मिलिट्री का मुख्य उद्देश्य सैन्य-नागरिक एकीकरण रणनीति था, वो भी वहां, जहां तिब्बत में दलाई लामा की विरासत अभी भी चली आ रही है।

रिपोर्ट में कहा गया कि व्यक्तिगत दिक्कतों से निजात पाने, डिलेवरी, मैटेरियल सप्लाई, रेस्क्यू, आपातकला को संभालने और सड़क सुरक्षा के लिए पीएलए ने सैन्य-नागरिक एकीकरण रणनीति को अपनाया। चीन के लॉजिस्टिक सपोर्ट डिमार्टमेंट के प्रमुख झांग वेनलॉन्ग ने कहा कि इस ड्रिल का उद्देश्य सैन्य-नागरिक एकीकरण को नया मोड़ देना था।

इस मिलिट्री ड्रील के दौरान स्थानीय तेल कंपनियों ने तेल सेना को तेल उपलब्ध करवाया, तो वहीं ल्हासा शहर की सरकार ने एक दिन के अभ्यास के लिए सेना को भोजन उपलब्ध करवाया। एक मिलिट्री एक्सपर्ट ने कहा कि ऊंचाई पर सैन्य तंत्रों और हथियारों को पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने कहा कि 1962 युद्ध में खराब सैन्य तंत्रों के सपोर्ट की वजह से चीन को वह फायदा नहीं पहुंचाया पाया था।

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