चारा घोटाले पर सोच आज लालू यादव को नहीं आयेगी नींद

लालू व मिश्र के अलावा इस विभाग के मंत्री, दो आईएएस अधिकारी और अन्य कई लोग शामिल हैं। सभी पर झारखंड के चाइबासा जिले के कोषागार से 37.70 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी करने का आरोप है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पी. के. सिंह घोटाले से संबंधित मामला संख्या आरसी 20 ए/96 में अपना फैसला सुनाएंगे। लालू प्रसाद के वकील ने 17 सितंबर को अपनी दलील पूरी की।
यह फैसला लालू प्रसाद के लिए अहम है क्योंकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के कारण मामले में दोषी ठहराए जाने पर उनकी संसद सदस्यता खतरे में पड़ जाएगी। सरकार ने ऐसे जनप्रतिनिधियों को अपील में जाने तक मिल रहे संरक्षण को शीर्ष अदालत द्वारा अवैध करार दिए जाने को निष्प्रभावी करने के लिए अध्यादेश लाया था, लेकिन इसपर विवाद मचने के बाद उसका अस्तित्व में आना संदिग्ध हो गया है।
मामले में 56 लोग आरोपी बनाए गए थे। सुनवाई के दौरान सात आरोपियों की मौत हो गई, दो वायदा माफ गवाह बन गए और एक ने आरोप स्वीकार कर लिया और एक को आरोप मुक्त करार दिया गया। न्यायाधीश पी. के. सिंह ने फैसला सुनाने के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की थी और मामले में बचेखुचे 45 आरोपियों को अदालत में हाजिर रहने के लिए कहा था।
इस घोटाले में आरोपी बनने के बाद लालू प्रसाद को 1997 में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। यह घोटाला 1996 में सामने आया था। घोटाले से संबंधित 61 में से 54 मामले वर्ष 2000 में पृथक राज्य के रूप में गठित होने के बाद झारखंड स्थानांतरित कर दिए गए। सीबीआई की विभिन्न अदालतें 43 मामलों में अपना फैसला सुना चुकी हैं। लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र पांच मामलों में आरोपी हैं।












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