17वीं लोकसभा में बना ये 'रिकॉर्ड', 100 सांसदों ने की भागीदारी
नई दिल्ली- गुरुवार को लोकसभा में भारतीय रेलवे के डिमांड और ग्रांट पर हुई लंबी बहस को एक 'रिकॉर्ड' बताया जा रहा है। ये बहस आधी रात से ठीक पहले यानी 11 बजकर 58 मिनट तक चली, जिसमें लगभग 100 सांसदों ने हिस्सा लिया। इस बात की जानकारी खुद संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने दी है।

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को भारतीय रेलवे से जुड़ी डिमांड और ग्रांट को लेकर चली बहस को एक 'रिकॉर्ड' करार दिया है। उन्होंने कहा है कि, "लगभग 18 साल में ये पहली बार हुआ है कि लोअर हाउस (लोक सभा) इतने लंबे वक्त तक चली है। " उन्होंने कहा है कि गुरुवार को दोपहर बाद शुरू हुई ये चर्चा आधी रात तक बिना रुके चलती रही और इसमें करीब 100 सांसदों ने अपनी भागीदारी निभाई, जो कि 'एक रिकॉर्ड है।'
हालांकि, बहस के दौरान विपक्ष ने मोदी सरकार पर सर्विस पर ध्यान देने के बजाय रेलवे से जुड़ी संपत्तियों को बेचने का आरोप भी लगाया। हालांकि, सरकार की ओर से दावा किया गया कि ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में रोज नई प्रगति हो रही है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी और सफाई के मामले में। लेकिन, कांग्रेस, तृणमूल और दूसरे दलों के नेताओं ने सरकार पर रेलवे के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि वो बुलेट ट्रेन की तरह ही लोगों को सपने बेच रही है। विपक्ष का दावा था कि ऐसे प्रोजेक्ट कभी संभव ही नहीं हैं।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी के सुनील कुमार सिंह ने बताया कि यूपीए के जमाने से रेलवे के परफॉर्मेंस में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में रेलवे ने रोज नए कीर्तिमान बनाए हैं। उन्होंने ये भी बताया कि बीते पांच वर्षों में रेल हादसों की संख्या में 73% की गिरावट आई है।
इस बीच रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रेलवे के निजीकरण की कोशिशों के आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नई तकनीक, लाइन और नए प्रोजेक्ट्स के लिए राष्ट्रहित में निवेश जरूर आमंत्रित करेगी।












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