जिस नेता ने विपक्ष को जोड़ने की मुहिम शुरू की, वह क्यों रह गए नीतीश की लिस्ट से बाहर?
पटना में बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों की जो एकजुटता बैठक होने वाली है, उस एकजुटता की शुरुआत केसीआर ने की थी। लेकिन, राजनीति में समय का चक्र ऐसा घूमा कि वह उससे गायब हो गए हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस विपक्षी महागठबंधन के लिए 23 जून को पटना में करीब 20 विपक्षी दलों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है, उसमें इस अभियान के 'अगुवा' के पहुंचने की जरा भी संभावना नहीं है। वैसे नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सलाह पर पटना में बुलाई गई है।

भाजपा-विरोधी विपक्ष के लिए बहुत महत्वपूर्ण है बैठक
कम से कम तीन बार विपक्षी दलों की महाबैठक टलने के बाद अब 23 जून की तारीख पक्की लग रही है। 12 जून को होने वाली यह बैठक इसलिए टालनी पड़ी, क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे निजी कार्यक्रमों में व्यस्त हो गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ एकजुटता के प्रदर्शन के लिए यह बैठक बहुत ही महत्वपूर्ण है।

केसीआर के पहुंचने की गुंजाइश नहीं
निश्चित रूप से अगर पटना में नीतीश कुमार के बुलावे पर तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने पहुंचने की हामी भरी है तो यह जेडीयू सुप्रीमो की बड़ी सफलता है। लेकिन, इस अभियान की शुरुआत करने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के सर्वेसर्वा के चंद्रशेखर राव के इसमें पहुंचने की जरा भी संभावना नहीं है।
विपक्षी एकता की मुहिम पहले केसीआर ने ही शुरू की थी
गौरतलब है कि जब पिछले साल अगस्त में नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर लालू यादव के आरजेडी का समर्थन मांगा था, तब सबसे पहले इस मुहिम के साथ 31 अगस्त, 2022 को केसीआर ही पटना पहुंचे थे। उन्होंने नीतीश कुमार और उनके डिप्टी तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद इस संबंध में एक प्रेस कांफ्रेंस भी की थी।
कांग्रेस की वजह से केसीआर हुए दूर!
खबरों के मुताबिक नीतीश ने उन्हें आखिर तक पटना में होने वाली बैठक में आने के लिए मनाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन, वह तैयार नहीं हुए। दरअसल, केसीआर की पार्टी के लिए तेलंगाना में कांग्रेस प्रतिद्विंद्वी है, इसलिए उन्होंने इस मुहिम से खुद को दूर कर लिया है।

इन विपक्षी नेताओं के पहुंचने की पुष्टि
बुधवार को जेडीयू और आरजेडी की ओर से जिन नेताओं के बैठक में पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि की गई, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, टीएमसी चीफ और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, शिवसेना (यूबीटी) के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, तमिलनाडु के सीएम और डीएमके नेता एमके स्टालिन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सीपीआई महासचिव डी राजा, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य शामिल हैं।
गैर-भाजपा दलों के ये नेता रहेंगे बैठक से दूर
विपक्षी दलों की इस बैठक से गैर-बीजेपी दलों के जिन और दिग्गज नेताओं के दूर रहने की संभावना है, उनमें वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी, टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर बादल,बीजू जनता दल के प्रमुख और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, बसपा प्रमुख मायावती और जेडीएस नेता देवगौड़ा भी शामिल हैं। इनमें से पटनायक से तो नीतीश भुवनेश्वर जाकर मिल भी आए हैं।

एक सीट पर एक विपक्षी उम्मीदवार है बैठक का मुख्य एजेंडा
वैसे पटना में विपक्षी दलों की यह बैठक 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक समीकरण जरूर तैयार करेगा। जानकारी के मुताबिक इस बैठक का प्रमुख एजेंडा देश की 543 लोकसभा सीटों में से कम से कम 450 पर विपक्ष का सिर्फ एक उम्मीदवार उतारने के लिए आपसी रजामंदी करना है।
अगर ऐसा हो जाता है तो यह बीजेपी के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। विपक्ष को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों से नई ऊर्जा मिली हुई है। इस साल जिन प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, वहां भी इससे विपक्षी एकता के लिए कोई चुनौती पैदा नहीं होगी।
विपक्ष को इन राज्यों में होगा एकता बनाने में परेशानी
लेकिन, विपक्ष को असली माथापच्ची लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दिल्ली की लोकसभा सीटों को लेकर करनी होगी। जहां कांग्रेस की तुलना में बाकी विपक्षी दल कहीं ज्यादा मजबूत हैं।












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