JNU प्रोटेस्ट के दौरान 'फ्री कश्मीर' का पोस्टर दिखाने वाली लड़की के खिलाफ FIR
नई दिल्ली। जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा के खिलाफ मुंबई में सोमवार को प्रदर्शन के दौरान 'फ्री कश्मीर' के पोस्टर देखने को मिला था। 'फ्री कश्मीर' का पोस्टर दिखाने वाली लड़की का नाम महक मिर्जा बताया जा रहा है। अब इस पोस्टर पर विवाद शुरू हो गया है। पुलिस ने महक मिर्जा प्रभु के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस पोस्टर की न सिर्फ बीजेपी, बल्कि कांग्रेस के नेताओं ने भी जमकर आलोचना की। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव सरकार को आड़े हाथों लिया और पूछा कि क्या उन्हें फ्री कश्मीर भारत विरोधी अभियान बर्दाश्त है?
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महक मिर्जा पर धारा 153 ए के तहत मामला दर्ज
सोमवार को एक न्यूज एजेंसी की ओर से जारी वीडियो में एक युवती हाथ में 'फ्री कश्मीर' का पोस्टर थामे खड़ी दिखाई दी थी। महक मिर्जा पर धारा 153 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के बाद अब तक कुल चार एफआईआर दर्ज की है। सूत्रों के अनुसार, अब तक दो मामले कोलबा पुलिस स्टेशन में और दो एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इनमें से दो एफआईआर में उमर खालिद और सुर्वना सालवे के नाम भी शामिल है।

महक ने वीडियो जारी कर दी सफाई
कश्मीरी समझी जा रही युवती की पहचान मुंबई निवासी महक मिर्जा प्रभु के रूप में हुई है। वह पेशे से कहानीकार है। उसने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट के जरिए पूरी घटना का उल्लेख किया है। महक ने बताया है कि गेटवे ऑफ इंडिया पर पहुंचने के बाद वहां पड़े प्लैकार्ड को उसने उठाया था, लेकिन फ्री कश्मीर के पीछे उसकी मंशा घाटी में इंटरनेट पर लगाई गई पाबंदी हटवाना था। मैं कश्मीरी नहीं बल्कि मुंबई की रहने वाली हूं। मैं किसी गैंग का हिस्सा नहीं हूं।
राजनीतिक दलों ने की आलोचना
उन्होंने कहा, मैं हाथ में फूल लिए खड़ी थी। इसका मतलब है कि हमें वहां शांति बनाए रखने की जरूरत है। यही मेरा मकसद था। लेकिन जो निष्कर्ष निकला वह पूरी तरह गलत था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह घटना काफी डरावनी है। साथ ही उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जो उन्होंने बोला वही बात कही जाए न कि नफरत फैलाई जाए। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, 'मैंने अखबार में पढ़ा कि 'मुक्त कश्मीर' का पोस्टर दिखानेवाले छात्रों ने सफाई दी है कि वे इंटरनेट सेवाओं, मोबाइल सेवाओं और अन्य मुद्दों पर प्रतिबंध से मुक्त रहना चाहते हैं। इसके बावजूद अगर कोई भारत से कश्मीर की आजादी की बात करता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।












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