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भारत में वर्ष 2016 से 2019 तक किसानों की आत्महत्या में आई गिरावटः NCRB

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार कृषि क्षेत्र में आत्महत्याओं में चार वर्षों में लगातार गिरावट आई है। NCRB द्वारा एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स पर जारी आंकड़ों का एक तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि कृषि क्षेत्र में आत्महत्याओं में 10 फीसदी की गिरावट आई है। वर्ष 2016 में जहां 11,379 किसानों की मौत हुई थी, वहीं, 2019 में यह घटकर 10,281 रह गई है।

    NCRB Report: किसानों से ज्यादा दिहाड़ी मजदूरों ने की खुदकुशी, जानिए आंकड़े | वनइंडिया हिंदी

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    कृषि क्षेत्र के लोगों की आत्महत्या में तब और बड़ी गिरावट दिखती है जब?

    कृषि क्षेत्र के लोगों की आत्महत्या में तब और बड़ी गिरावट दिखती है जब?

    हालांकि एनसीआरबी के जारी किए डेटा से जब खेती करने वालों और खेतिहर मजदूरों को अलग-अलग किया जाता है, तो पता चलता है कि कृषि क्षेत्र के लोगों की आत्महत्या में और बड़ी गिरावट दिखती है। आंकड़ों के मुताबिक किसान (भूमि मालिक और पट्टे पर खेती करने वाले किसान) की आत्महत्या में 5 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि कृषि कामों में हाथ बंटाने वाले आत्महत्या में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

    वर्ष 2015 में किसानों की आत्महत्याओं में 21 फीसदी की गिरावट देखी गई थी

    वर्ष 2015 में किसानों की आत्महत्याओं में 21 फीसदी की गिरावट देखी गई थी

    हालांकि वर्ष 2015 के आंकड़ों को संदर्भ 2016 में यह आकंड़े कम जरूर है, क्योंकि वर्ष 2015 में किसानों (किसानों) की आत्महत्याओं में 21 फीसदी की गिरावट देखी गई थी, लेकिन कृषि क्षेत्र से जुड़े मजदूरों द्वारा की आत्महत्याओं में 10 फीसदी की वृद्धि हुई थी, लेकिन 2015 की तुलना में वर्ष 2016 में कृषि क्षेत्र में हुई कुल आत्महत्याओं में गिरावट देखी गई है।

    लगातार दो वर्षों के सूखे से 2015 में आत्महत्याओं में तेज उछाल आया था

    लगातार दो वर्षों के सूखे से 2015 में आत्महत्याओं में तेज उछाल आया था

    लगातार दो वर्षों के सूखे के चलते वर्ष 2015 ने खेती करने वालों के बीच आत्महत्याओं में तेज उछाल देखा गया था। उस वर्ष 8,000 से अधिक आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो वर्ष 2014 के मुकाबले लगभग 40 फीसदी की वृद्धि थी।

    NCRB ने वर्ष 2017, 2018 और 2019 के लिए डेटा एक साथ जारी किया है

    NCRB ने वर्ष 2017, 2018 और 2019 के लिए डेटा एक साथ जारी किया है

    NCRB ने वर्ष 2017, 2018 और 2019 के लिए डेटा एक साथ जारी किया है। हालांकि 2017 और 2018 के आंकड़ों को जारी करने में बहुत ज्यादा देरी की गई है। अंतिम एनसीआरबी रिपोर्ट - वर्ष 2016 में जारी की गई थी। वहीं, किसान आत्महत्याओं पर पिछला आंकड़ा नवंबर 2019 में जारी किया गया था। उस अंतिम रिपोर्ट में द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा 9 नवंबर, 2019 को रिपोर्ट की गई थी।

    किसानों की आत्महत्या के कारणों में फसल की विफलता और कर्ज प्रमुख थे

    किसानों की आत्महत्या के कारणों में फसल की विफलता और कर्ज प्रमुख थे

    एनसीआरबी ने किसानों की आत्महत्या के कारणों का उल्लेख किया था, जिसमें फसल की विफलता और कर्ज जैसे कारण प्रमुख थे,जबकि आंकड़ों से पता चलता है कि 2016 से 2019 तक कृषि क्षेत्र में आत्महत्याओं में 10 फीसदी की गिरावट आई है।

    पिछले वर्ष आत्महत्याओं में 3.4 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी

    पिछले वर्ष आत्महत्याओं में 3.4 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी

    खेती करने वालों के बीच आत्महत्याओं में 2016 से 2018 तक लगातार गिरावट देखी गई, लेकिन पिछले वर्ष इसमें 3.4 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि कृषि से जुड़े मजदूरों के बीच आत्महत्याएं 2016 में 5,109 से घटकर 2019 में 4,324 हो गई।

    आंकड़ों में किसानों द्वारा राज्य-वार आत्महत्याओं पर विस्तृत डेटा नहीं है

    आंकड़ों में किसानों द्वारा राज्य-वार आत्महत्याओं पर विस्तृत डेटा नहीं है

    वैसे, एनसीआरबी द्वारा जारी 2017 और 2018 के आंकड़ों में किसानों द्वारा राज्य-वार आत्महत्याओं पर कोई विस्तृत डेटा नहीं है, जबकि 2018 की रिपोर्ट में 2008 के लिए राज्यवार आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।

    कृषि क्षेत्र में 3,900 आंकड़ों के साथ आत्महत्याओं में शीर्ष पर है महाराष्ट्र

    कृषि क्षेत्र में 3,900 आंकड़ों के साथ आत्महत्याओं में शीर्ष पर है महाराष्ट्र

    2019 के लिए राज्य-वार आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र 3,900 आंकड़ों के साथ अधिक कृषि क्षेत्र में हुई आत्महत्याओं में शीर्ष पर है। इनमें से 2,680 (65 फीसदी) कृषक और बाकी खेतिहर मजूदर हैं। दूसरे नंबर कर्नाटक (1,992), तीसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश (1,029), चौथे नंबर पर मध्य प्रदेश (541), पांचवें नंबर पर तेलंगाना (499) और छठे नंबर पंजाब (302) है, जहां कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक आत्महत्याएं हुई हैं। इस सूची में पंजाब का नाम पहली बार जुड़ा है।

    मध्यप्रदेश में अधिकांश कृषि क्षेत्र की आत्महत्याएं खेतिहर मजदूरों ने की

    मध्यप्रदेश में अधिकांश कृषि क्षेत्र की आत्महत्याएं खेतिहर मजदूरों ने की

    मध्यप्रदेश के आंकड़ों से पता चलता है कि यहां अधिकांश कृषि क्षेत्र की आत्महत्याएं खेतिहर मजदूरों की थी, खेती करने वालों किसानों की नहीं। मध्य प्रदेश में 541 कृषि क्षेत्र में हुई आत्महत्याओं में से केवल 142 कृषक शामिल थे। यह आंकड़ा शीर्ष छह राज्यों में किसी भी राज्य में नहीं मिला है।

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    English summary
    According to the latest data released by the National Crime Records Bureau (NCRB), there has been a steady decline in agricultural suicides in four years. A comparative study of data released by NCRB on Accidental Deaths and Suicides suggests that there has been a 10 percent drop in suicides in the agricultural sector. While 11,379 farmers died in the year 2016, it has come down to 10,281 in 2019.
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