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हरिद्वार कुंभ: एक लाख से ज़्यादा लोगों के कोविड टेस्ट की झूठी रिपोर्ट, क्या है पूरा मामला?

By BBC News हिन्दी
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कुंभ के दौरान इस साल 1 से 30 अप्रैल के बीच हरिद्वार की दो निजी लैब में एक लाख से अधिक कोविड टेस्ट रिपोर्ट के झूठे पाए जाने के बाद इस पूरे मामले की जांच जारी है.

एक तरफ जहां ये एक बड़े आर्थिक घोटाले की तरफ इशारा है वहीं इस पूरे मामले में लोगों को झूठी कोविड रिपोर्टें देकर बड़ा जोखिम भी मोल लिया गया है.

कुंभ के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के झूठे टेस्ट कर उन्हें नेगेटिव रिपोर्ट दी गई. ग़ौरतलब है कि इस दौरान हरिद्वार की पॉज़िटिविटी दर प्रदेश के बाक़ी जिलों की अपेक्षा काफी कम पाई गई.

इस पूरे मामले में अब नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाख़िल की गई है और जांच की मांग की गई है.

क्या है पूरा मामला?

22 अप्रैल को पंजाब के फरीदकोट के एलाईसी एजेंट विपिन मित्तल के पास एक एसएमएस आया, जिसमें बताया गया कि उनकी कोविड टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई है. साथ ही टेस्ट रिपोर्ट का लिंक भी शेयर किया गया.

चौंकाने वाली बात ये थी कि विपिन ने कभी कोविड टेस्ट कराया ही नहीं. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय अधिकारियों को इसकी शिकायत की. लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

इसके बाद विपिन ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को ई-मेल के ज़रिये अपनी शिकायत भेजी.आईसीएमआर ने अपनी जांच में पाया कि विपिन का कोविड सैंपल हरिद्वार में लिया गया था. उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग को मामले की जांच सौंप दी गई.

स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने मामले की शुरुआत जांच करायी, जिससे पता चला कि अकेले विपिन मित्तल ही नहीं बल्कि ऐसे एक लाख फर्ज़ी कोविड टेस्ट किए गए हैं. एक ही मकान नंबर और एक ही मोबाइल नंबर पर 50-60 तक फर्ज़ी रिपोर्ट तैयार किये गए हैं.

कुंभ मेला उत्तराखंड
DIPR, Uttrakhand
कुंभ मेला उत्तराखंड

झूठी कोरोना रिपोर्ट मामले की जांच

निजी लैब की झूठी कोरोना रिपोर्ट के मामले की जांच हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी सौरभ गहरवार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति कर रही है.

सौरभ बताते हैं कि 15 दिन के भीतर वो अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे. लेकिन सवाल ये है कि क्या ज़िले के सभी 22 निजी लैब की जांच की जाएगी? साथ ही सरकारी लैब भी क्या जांच के दायरे में होंगे?

सौरभ जांच पूरी होने तक इस मामले से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार करते हैं.

उत्तराखंड में निजी लैब को एक एंटीजन टेस्ट पर सरकार की तरफ़ से 300 रुपये मिलते हैं. यानी एक लाख टेस्ट पर तीन करोड़ रुपए.

हरिद्वार के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और कोविड टेस्टिंग के प्रभारी डॉ विनोद टम्टा बताते हैं कि निजी लैब को एक एंटीजन टेस्ट पर 300 रुपये देने का अनुबंध है. लेकिन ज़िले के टेस्टिंग प्रभारी होने के बाद भी कोविड टेस्ट की झूठी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देने से वे इनकार करते हैं.

कुंभ के दौरान जो प्रदेश में दरें लागू थीं उसके अनुसार प्रदेश में एंटीजन टेस्ट के लिए निजी लैब को 300 रुपये दिए जाते थे, वहीं आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए तीन श्रेणियां बनाई गई थी. सरकारी सेटअप से लिए गए सैंपल सिर्फ़ जांच के लिए निजी लैब को देने पर प्रति सैंपल 400 रुपये का भुगतान करना होता है. निजी लैब खुद कोविड जांच के लिए नमूना लेती है तो उस सूरत में उसे 700 रुपये का भुगतान होता है. वहीं घर जाकर सैंपल लेने पर 900 रुपए का भुगतान होता है. इन दरों में समय-समय पर बदलाव किया जाता है.

डॉ विनोद टम्टा इतना तो बताते हैं कि निजी लैब को 30 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका था लेकिन ये भुगतान किस समय सीमा के लिए किया गया, इसका और इस मामले पर और अधिक जवाब देने से वह बचते हैं.

नैनीताल हाईकोर्ट ने कुंभ के दौरान 1-30 अप्रैल तक 50 हजार टेस्ट रोज़ाना करने के निर्देश दिए थे.

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आईसीएमआर की ओर से अधिकृत 9 एजेंसियों और 22 निजी लैब ने चार लाख कोविड टेस्ट किए थे. इनमें से ज़्यादातर एंटीजन टेस्ट थे. इसके अलावा सरकारी लैब में भी टेस्ट कराए गए थे.

कुंभ मेला उत्तराखंड
DIPR, Uttrakhand
कुंभ मेला उत्तराखंड

10 से 14 अप्रैल के बीच कुंभ में कोविड टेस्ट

हरिद्वार में 12 और 14 अप्रैल को कुंभ के दो बड़े शाही स्नान संपन्न हुए और लाखों की संख्या में श्रद्धालु इनमें शामिल हुए.

मेला अधिकारी रहे दीपक रावत ने 10 से 14 अप्रैल के बीच कुंभ में किए गए कोविड टेस्ट के आंकड़े साझा किये थे. इन 5 दिनों में कुल 2,14,015 एंटीजन टेस्ट किये गए. वहीं 57 ट्रुनेट टेस्ट (24 सितंबर 2020 को आईसीएमआर ने कोविड संक्रमण की पुष्टि के लिए ट्रूनेट टेस्ट के इस्तेमाल की इजाज़त दी थी), 26,654 आरटीपीसीआर टेस्ट किए गए. यानी कुल मिलाकर 240,726 टेस्ट किए गए.

उस वक्त लागू दरों के हिसाब से एंटीजन टेस्ट की क़ीमत हुई 64,204,500 रुपये, आरटीपीसीआर टेस्ट की 10,661,600 रुपये (400 रुपये के न्यूनतम दर प्रति टेस्ट के हिसाब से). यानी कुल मिलाकर 64,204,500 रुपये.

कोविड की फर्जी टेस्ट रिपोर्ट कितना बड़ा घोटाला हो सकती है, 5 दिनों के टेस्ट का ये हिसाब-किताब सिर्फ़ इसके आकलन के लिए है.

इन एंटीजन टेस्ट में 698 लोगों की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई थी. वहीं ट्रुनेट टेस्ट में 1 एक व्यक्ति और आरटीपीसीआर टेस्ट में 1,166 लोगों के पॉज़िटिव होने की पुष्टि हुई थी.

इस तरह 240,726 टेस्ट पर 1,865 लोग पॉज़िटिव पाए गए थे और पॉज़िटिविटी दर 0.77 फीसदी रही थी.

कुंभ मेला उत्तराखंड
Varsha Singh
कुंभ मेला उत्तराखंड

कोविड के हरिद्वार के आंकड़े चौंकाने वाले थे

देहरादून के एसडीसी फाउंडेशन ने एक से 30 अप्रैल के बीच उत्तराखंड और हरिद्वार के कोरोना आंकड़ों का विलेषण किया.

इस दौरान हरिद्वार में कुल 600,291 टेस्ट किए गए और इनमें से 17,335 मामले पॉज़िटिव पाए गए. जबकि राज्य के 12 अन्य ज़िलों में कुल 442,432 टेस्ट किए गए और इनमें 62,775 पॉज़िटिव केस पाए गए. इस हिसाब से हरिद्वार की पॉज़िटिविटी दर 2.89 फीसदी रही और राज्य के 12 ज़िलों की पॉज़िटिविटी दर 14.18 फीसदी रही.

यानी राज्य में किए गए कुल कोविड टेस्ट का 58 फीसदी हिस्सा अकेले हरिद्वार में किया गया. लेकिन हरिद्वार ज़िले का पॉज़िटिविटी रेट 12 ज़िलों की तुलना में 80 फीसदी कम रहा.

याद रहे कि कुंभ मेला प्रशासन ने हरिद्वार कुंभ में 70 लाख लोगों के शामिल होने का आंकड़ा पेश किया था.

नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाख़िल

9 जून 2021 को नैनीताल हाईकोर्ट में कोविड रिपोर्ट में हुई गड़बड़ियों से जुड़ी एक जनहित याचिका दाख़िल की गई. इसमें सीबीआई से इस पूरे मामले के जांच की मांग की गई है.

23 जून को इस मामले पर सुनवाई होनी है.

याचिका दाख़िल करने वाले हरिद्वार निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता सच्चिदानंद डबराल कहते हैं "ज़िला प्रशासन के आंकड़े लगातार संदेह पैदा कर रहे हैं. जब हमारे पास सही आंकड़े नहीं है तो हम कोविड का सही प्रबंधन कैसे करेंगे."

इस जनहित याचिका में स्टार इमेजिंग पैथ लैब प्राइवेट लिमिटेड में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे युवाओं का एक प्रार्थनापत्र भी शामिल है, जो उप-ज़िला अधिकारी को लिखा गया था. ये सभी युवा हरिद्वार में प्रवेश करने के लिए रायवाला गेट पर आने वाले लोगों का रैपिड एंटीजन टेस्ट कर रहे थे. इन्होंने ग़लत टेस्ट रिपोर्ट के लिए दबाव बनाने पर उप-ज़िलाधिकारी को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की थी.

पत्र में लिखा गया है "हमें बिना टेस्ट किट इस्तेमाल किए सभी लोगों को नेगेटिव रिपोर्ट देने को कह रहे थे. सिर्फ़ पुलिस अधिकारी और कुछ ही लोगों का सही तरीके से टेस्टिंग करने को कहा जा रहा था. हम सभी लोगों ने ऐसा करने मना कर दिया तो हमें नौकरी से निकाल दिया गया."

नैनीताल हाईकोर्ट में इस मामले की पैरवी करने वाले वकील दुष्यंत मैन्यूली बताते हैं "कुंभ के समय आ रहे लोग हरिद्वार में प्रवेश कर सकें, इसके लिए भी ग़लत नेगेटिव रिपोर्ट दिखाई गई. बॉर्डर पर बने चेक प्वाइंट्स पर पुरानी टेस्ट किट इस्तेमाल की गई. ये उन लोगों की टेस्ट किट थी, जिनकी रिपोर्ट पहले ही नेगेटिव आ चुकी थी".

अलग-अलग बयान

नैनीताल हाईकोर्ट ने कुंभ के दौरान रोज़ाना 50 हज़ार टेस्ट करने के निर्देश दिए थे. स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने 31 मार्च 2021 को हाईकोर्ट में इस संबंध में जवाब दाख़िल कर कहा था कि इतने टेस्ट कराना संभव नहीं है. उन्होंने अदालत से इसमें राहत की अपील की थी.

14 अप्रैल को बैसाखी का हुए शाही स्नान संपन्न के बाद मेला प्रशासन ने मीडिया ब्रीफिंग की थी. इसमें मेला अधिकारी दीपक रावत, आईजी मेला संजय गुंज्याल समेत अन्य अधिकारी शामिल थे.

इस दौरान मीडियो को बताया गया कि ज़िला स्वास्थ्य विभाग और मेले से जुड़ी अन्य एजेंसियों के माध्यम से रोज़ाना तकरीबन 50 हज़ार टेस्ट हो रहे हैं.

19 अप्रैल को नैनीताल हाईकोर्ट में कुंभ मेला अधिकारियों ने अलग-अलग जवाब दाख़िल किए.

जवाब में कहा गया "आरटी-पीसीआर टेस्ट के नतीजे आने में अधिक समय लगता है. कुंभ में आने वाले ज़्यादातर लोग एक जगह नहीं टिकते और ये फ्लोटिंग पॉप्युलेशन है. इसलिए श्रद्धालुओं का आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना संभव नहीं है. हालांकि मेला क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया है".

यह भी कहा गया "हरिद्वार आने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन कम-ज़्यादा होती रहती है इसलिए टेस्ट संख्या फिक्स करना भी सही नहीं है. यहां सर्वाधिक 48,270 टेस्ट 13 अप्रैल को किए गए और 14 अप्रैल को 40,185 टेस्ट कराए गए. 31 मार्च को हमने पहले ही 50 हज़ार टेस्ट प्रतिदिन कराए जाने में राहत मांगी थी".

उत्तराखंड में कोरोना के आंकड़े
coronalevel.com/India/Uttarakhand
उत्तराखंड में कोरोना के आंकड़े

जोखिम भरा झूठ!

कोविड टेस्ट को लेकर किया गया हेरफेर, आर्थिक घोटाले के साथ मेले में शामिल लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हुआ. कुंभ के आयोजन के बाद उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का ग्राफ़ तेज़ी से ऊपर चढ़ा.

देश के दूसरे हिस्सों में भी कोरोना के मामलों में तेज़ी आई. इनमें से ऐसे कई मामले थे जिनमें लोग कुंभ मेले अपने घरों को लौटे थे.

एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल कहते हैं "राज्य की तुलना में हरिद्वार में लगातार कम पॉज़िटिविटी दर के बावजूद हरिद्वार ज़िला प्रशासन ने इस पर आंखें मूंदें रखी. कुंभ मेला क्षेत्र के कोविड टेस्ट का डाटा भी सार्वजनिक तौर पर साझा नहीं किया गया."

वो कहते हैं, "कुंभ मेले के दौरान सभी सरकारी-निजी लैब के कोविड टेस्ट रिपोर्ट की न्यायिक जांच होनी चाहिए और ये जांच राज्य सरकार की एजेंसी से नहीं करायी जानी चाहिए. साथ ही राज्य का डाटा नए सिरे से तैयार करना चाहिए".

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English summary
false covid 19 reports of 1 lakh people during kumbh mela finds in investigation
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