Fact Check : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम से वायरल पोस्ट फर्जी, सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी का खुलासा
Fact Check: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से एक मनगढ़ंत स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इस छेड़छाड़ की गई तस्वीर में योगी आदित्यनाथ के हवाले से कहा गया है कि अगर बटोगे तो कश्मीर की तरह कटोगे ! एक रहोगे तो गुजरात की तरह काटोगे ! अब तय कर लो, काटना है या कटना है। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। जिससे लोगों के बीच बहस छिड़ गई।
फर्जी पोस्ट वायरल
वायरल स्क्रीनशॉट की जांच करने पर पता चला कि यह फर्जी और पूरी तरह से मनगढ़ंत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल पर 12 नवंबर 2024 को ऐसी कोई पोस्ट नहीं की गई थी। इसके अलावा वेब आर्काइव और Archive.is जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस पोस्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

संपादित स्क्रीनशॉट पर वाटरमार्क
स्क्रीनशॉट पर Pikaso.me का वॉटरमार्क दिखा। जिससे साफ हुआ कि यह स्क्रीनशॉट संपादन के लिए बनाए गए टूल्स का उपयोग करके तैयार किया गया था। Pikaso.me का उपयोग अक्सर सोशल मीडिया पोस्ट को स्टाइलिश बनाने या संपादित करने के लिए किया जाता है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का वास्तविक बयान
हालांकि 26 अगस्त 2024 को आगरा में जन्माष्टमी के अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने एक बयान दिया था। जिसमें उन्होंने विभाजन के बजाय एकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हमें बांग्लादेश से सबक लेना चाहिए। हमें विभाजित नहीं होना चाहिए। अगर हम विभाजित होंगे। तो हम कट जाएंगे, और अगर हम एकजुट रहेंगे, तो हम महान बने रहेंगे। इस बयान को विभिन्न चुनावी रैलियों में भी दोहराया गया था। लेकिन यह वायरल स्क्रीनशॉट में दिए गए भ्रामक उद्धरण से पूरी तरह अलग है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस फर्जी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने योगी आदित्यनाथ की बयानबाजी की तारीफ की और कहा कि बाबा हर गेंद पर छक्का लगाकर गद्दारों की लंका जला रहे हैं। सीएम योगी के इस वायरल पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया की जा रही है।
विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं ने इस विवाद को लेकर योगी आदित्यनाथ की आलोचना की। यहां तक कि महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी नेताओं, जैसे अजीत पवार और अशोक चव्हाण ने भी बयान पर सवाल उठाए। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर स्पष्टता की मांग की है।
वायरल पोस्ट में किया गया दावा पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक है। यह घटना सोशल मीडिया पर गलत जानकारी के तेजी से प्रसार का एक और उदाहरण है।
किसी भी खबर या पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। गलत सूचनाएं न केवल भ्रम पैदा करती हैं। बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहसों को भी भटकाती हैं।












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